जन सांस्कृतिक मंच द्वारा मनाया जा रहा है स्थापना की स्वर्ण जयंती
जन सांस्कृतिक मंच द्वारा मनाया जा रहा है स्थापना की स्वर्ण जयंती
-मानवीय रिश्तों की बुनावट में प्रेम और हिंसा विषय पर संपन्न हुई गोष्ठी एवं खुला संवाद
मथुरा । प्रेम आजादी है, हिंसा के बरअक्स प्रेम एक प्रतिरोध है, स्त्रीवाद की जमीन को पितृसत्तात्मक समाज में सींचने के लिए सबसे मुखर रूप से पुरुषों को ही आगे आना होगा, यह विचार दिल्ली से आयीं हंस पत्रिका की सहायक संपादक, लेखिका एवं कवित्री शोभा अक्षर ने जन सांस्कृतिक मंच द्वारा स्वर्ण जयंती वर्ष आयोजन के अवसर पर मानवीय रिश्तों की बुनावट में प्रेम और हिंसा विषय पर संपन्न हुई गोष्ठी कार्यक्रम में आरसीए गर्ल्स डिग्री कॉलेज में व्यक्त किए ।(30).jpg)
उन्होंने आगे कहा जैसे ज्योतिबा फुले, डॉक्टर अंबेडकर, डॉ0 लोहिया ईश्वर चंद्र विद्यासागर, राजा राम मोहन राय आगे आए, वह भी ऐसे समय में जब देश तैयार हो रहा था, तैयारी के उस दौर में स्त्रियों की आवाजें उतनी शामिल नहीं थीं इसलिए पुरुषों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, हिंसा को पुरुष और स्त्री में बांटकर देखना, एक किस्म की वैचारिक हिंसा ही है, हिंसा के कारणों को रेखांकित कर समाज में उसके प्रति रोकने का कार्य होना चाहिए, निर्मल इनिशिएटिव की डायरेक्टर डॉ0 श्वेता गोस्वामी ने कहा कि हिंसा के आगे खुद का हारा हुआ पन है, प्रेम सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने की शक्ति रखता है, प्रेम का विलोम हिंसा नहीं है ।
लेखिका एवं समाचार वाचिका पारुल बंसल ने कहा कि प्रेम सम्मान देता है, सम्मान संवाद देता है और संवाद हिंसा को पनपने नहीं देता, प्रेम मीरा श्याम ,गोपी कृष्ण सा है जहां पाने से अधिक समर्पण का भाव है, कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ0 प्रीति जौहरी ने पेड़ तथा मानव के संवाद के माध्यम से रिश्तों को समझाने का प्रयास किया तो वहीं वर्तमान प्राचार्या डॉ0 मंजू वाला अग्रवाल ने बदलते समय में रिश्तों को समझाते हुए, प्रेम की वास्तविकताओं पर प्रकाश और हिंसा के खतरों से सावधान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं मंच की उपाध्यक्ष प्रीति अग्रवाल ने कहा कि प्रेम शाश्वत है और अनंत काल तक रहेगा लेकिन हमें रिश्तों को समझना होगा, सच्चा प्रेमी कौन है ?
मंच के अध्यक्ष राज किशोर अग्रवाल ने सभी को धन्यवाद देते हुए कॉलेज के प्रबंधन एवं समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त किया, संचालन डॉ0 भारती सागर ने किया, व्यवस्था प्रबंधन मुरारी लाल अग्रवाल एवं डॉ0 धर्मराज ने किया, अनीता अग्रवाल आशा गोयल, मधु अग्रवाल रामा चतुर्वेदी, सुनील आचार्य, दीपक गोयल डॉ0 आर के चतुर्वेदी, अरविंद टीटू ,मुरारी लाल गर्ग, वीना गर्ग छाया अग्रवाल, योगेश शर्मा, संजय भटनागर, हरीश अग्रवाल ,सुरेश कुमार सैनी, अनिल चतुर्वेदी, विवेक दत्त मथुरिया आदि मौजूद रहे ।







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