हम बनी बनाई सड़कों को फिर से बना रहे हैं।और जनता है कि साथ ही नहीं देती
हम बनी बनाई सड़कों को फिर से बना रहे हैं।और जनता है कि साथ ही नहीं देती
जो घर- दुकान एक दो सीढ़ी लगाकर चढ़ते थे आज उतरने के लिये एक दो सीढ़ी लगाते हैं, इससे ज्यादा क्या विकास चाहिये ?
मथुरा । जनता बहुत ज्यादा जागरूक हो चुकी है। बनी बनाई मजबूत सुंदर टिकाऊ सड़कों को 2 से तीन साल में किसी न किसी बहाने से गड्ढे करके बेढंगा करना और फिर दुबारा बनाना यह क्रम शहरों में काफी लंबे समय से आपसी मिली भगत से चल रहा है।
जनता कहती है आप सड़क नहीं बनवा रहे हम बनी बनाई सड़कों को दुबारा बनवा रहे हैं।अरे फिर भी जनता को विकास नहीं दिखता।
10 से पंद्रह वर्ष में हमने शहरों की सड़कों को 4 से 5 फीट ऊंचा उठा दिया और जनता कहती है विकास नहीं हो रहा।
इससे बड़ा सबूत क्या हो सकता है कि पहले जनता को अपने घर दुकान में ऊपर चढ़ने के लिये एक या दो सीढ़ी लगानी पड़ती थी आज नीचे उतरने के लिये एक या दो सीढ़ी लगानी पड़ रही हैं।
जनता की यह बात बिल्कुल झूठी है कि विकास नहीं हो रहा हम किसी न किसी बहाने से बनी बनाई सड़क को छह महीने के अंदर हर हाल में खोद देते हैं।और अगले साल उसे फिर नई बनाने का टेंडर पास करा देते हैं।तो हम कैसे मान लें कि विकास नहीं हो रहा।
अरे!इससे तेज विकास की गति और क्या हो सकती है।चौराहों पर डिवाइडर और बेरिकेट्स आपने देश की किसी राज्य की ट्रॉफिक नियम में देखे हैं।लेकिन हमने उसे भी पूरा करके दिखा दिया।
आपके लिये हम नियमों को ठेंगे पर रखकर दिन रात काम कर रहे हैं और आप कहते हो विकास नहीं हो रहा।यह हमारे विकास की परिणीति ही है।कि आपको हर सड़क पर जाम मिलेगा।क्योंकि हम विकसित देश की योजना बना रहे हैं।आप उस पर अमल कर रहे हो।तो मिलकर ही विकास होता है।
@कैसा विकास चाहिये आपको हमको पता तो लगे?
-अजय कुमार अग्रवाल
समाज चिंतक,स्वतन्त्र पत्रकार







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