अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड : एलडीए के अधिकारियों पर हो कठोर कार्रवाई
अलीगंज कोचिंग सेंटर अग्निकांड : एलडीए के अधिकारियों पर हो कठोर कार्रवाई
-घोर लापरवाही बनी अग्निकाण्ड की बड़ी बजह, एलडीए उपाध्यक्ष की तय होनी चाहिये जवाबदेही
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुई भीषण अग्निकांड की घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, मासूम विद्यार्थियों की जान जाने के बाद अब प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय दिखाई दे रही है लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या केवल घटना के बाद की जाने वाली कार्रवाई ही पर्याप्त है या फिर उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी जिनकी लापरवाही और निष्क्रियता ने ऐसी त्रासदी को जन्म दिया ?
यदि भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, यदि निर्माण अथवा उपयोग नियमों के विपरीत था तो लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की ? वर्षों तक नियमों की अनदेखी कैसे होती रही? क्या निरीक्षण नहीं हुए या फिर जानबूझकर आँखें मूंद ली गईं ? इन प्रश्नों के उत्तर जनता जानना चाहती है ।
घटना के बाद सीलिंग अभियान चलाना और नोटिस जारी करना प्रशासन की जिम्मेदारी से मुक्ति का प्रमाण पत्र नहीं हो सकता, वास्तविक आवश्यकता यह है कि उन अधिकारियों की पहचान की जाए जिन्होंने अपने वैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं किया, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही के कारण जनहानि हुई है तो उसके विरुद्ध केवल विभागीय कार्रवाई नहीं बल्कि कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए ।

इस संदर्भ में लखनऊ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शिखर सिंह लंबे समय से एलडीए की कार्यप्रणाली, लापरवाही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाते रहे हैं, उन्होंने विभिन्न लेखों और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से बार-बार यह मुद्दा उठाया है कि विकास प्राधिकरणों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारियों की जवाबदेही के अभाव के कारण नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, उन्होंने उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एवं डेवलपमेंट कानूनों में कठोर सुधार तथा दोषी अधिकारियों पर व्यक्तिगत दायित्व तय करने की मांग भी लगातार की है ।
अधिवक्ता शिखर सिंह का कहना है कि जब तक नियमों के उल्लंघन को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का सिलसिला नहीं रुकेगा, अलीगंज की यह दुखद घटना उनके द्वारा वर्षों से उठाए जा रहे उन्हीं गंभीर सवालों को फिर से सामने लेकर आई है ।
जनता अब केवल जांच समितियों और औपचारिक बयानों से संतुष्ट नहीं होगी, आवश्यकता इस बात की है कि एलडीए के उन सभी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने कर्तव्यों की उपेक्षा की, यदि दोष सिद्ध हो तो उनके विरुद्ध ऐसी कार्रवाई की जाए जो भविष्य के लिए नज़ीर बने, अलीगंज अग्निकांड में मृत बच्चों के परिवारों को न्याय तभी मिलेगा जब इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति और अधिकारी को कानून के दायरे में लाया जाएगा अन्यथा यह घटना भी उन अनेक हादसों की तरह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी जिनसे सबक लेने का दावा तो किया गया, पर व्यवस्था कभी बदली नहीं ।






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