यमुना में सुरक्षा को वर्ष 1988 में गठित हुई थी रिवर पुलिस, फिलहाल लापता

यमुना में सुरक्षा को वर्ष 1988 में गठित हुई थी रिवर पुलिस, फिलहाल लापता
-प्रशासनिक आलाधिकारियों को भी नहीं रिवर पुलिस के सम्बंध में कोई भी जानकारी 
   मथुरा । यमुना की सुरक्षा के लिए तैनात की गई रिवर पुलिस भी अब गायब हो गई, स्वामी घाट पर ढाई दशक पहले खोली गई अस्थाई पुलिस चौकी के कक्ष को अब जेनरेटर कक्ष में तब्दील कर दिया गया है, रिवर पुलिस का लगा बोर्ड भी लापता है, रिवर पुलिस की तैनाती उस समय की गई थी जब ब्रज में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सीमित थी, श्रद्धालुओं का अधिकांश दबाव श्रीकृष्ण जन्मभूमि, विश्राम घाट, द्वारिकाधीश मंदिर और यमुना के घाटों पर रहता था, उस समय महसूस किया गया था कि यमुना में स्नान और नाव से पर्यटन करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा आवश्यक है ।
   पिछले एक दशक में ब्रज में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, इन श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की है जो धार्मिक पर्यटन के लिए यहां आते हैं, तनाव और भागमभाग भरी जिंदगी में कुछ सुकून के पल तलाशने के लिए धार्मिक स्थलों जिसमें भी मथुरा वृंदावन जैसे ग्रामीण परिवेश से आच्छादित परिवेश के स्थल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, कई इतर कारणों से भी मथुरा वृंदावन का बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार पिछले सालों में हुआ है जिसका नतीजा है कि करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है और यमुना नदी में भी गतिविधियां बढ़ी हैं, इस बात से प्रशासन और खुद सरकार भी अनभिज्ञ नहीं है, इसका आर्थिक लाभ उठाने के लिए क्रूज जैसी गतिविधियां भी सरकार की ओर से यहां की गई हैं, बावजूद इसके जल विहार या नदी पर्यटन के जोखिम भी कम नहीं हैं, शुक्रवार को हुआ हादसा इसका जीता जागता उदाहरण है ।
  हाईकोर्ट ने वर्ष 1998 को एसएसपी को रिवर पुलिस का गठन करने के आदेश दिए थे, रिवर पुलिस में एक सब इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और छह सिपाही नियुक्त किए गए, स्वामी घाट पर एक अस्थाई पुलिस चौकी खोली गई, पुलिसकर्मियों के रहने के लिए एक कक्ष भी निर्धारित किया गया, लोगों की जानकारी के लिए रिवर पुलिस का बोर्ड लगाया गया, उस समय रिवर पुलिस का दायित्व पूजा की सामग्री, फूल पत्ती, कूड़ा-करकट, मलबा, मृत जानवर, लावारिस शव प्रवाहित करने और यमुना किनारे शौच करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना था, यमुना जल को दूषित करने वालों के चालान करने थे ।
  गौरतलब यह भी है कि रिवर पुलिस को मथुरा से लेकर वृंदावन तक गश्त करनी थी, इसके साथ ही विषम परिस्थितियों में रिवर पुलिस की संबंधित थाना और चौकी की पुलिस को सहयोग करना है, इसकी मानीटरिग का कार्य सीओ सिटी को सौंपा गया, रिवर पुलिस जो भी कार्रवाई करती, उस कार्रवाई का विवरण भी यमुना कार्ययोजना की होने वाली बैठक में रिवर पुलिस को प्रस्तुत करना था, रिवर पुलिस कागज पर आज भी गठित है, मगर कार्य नहीं कर रही है, रिवर पुलिस की निष्क्रियता से यमुना किनारे अतिक्रमण भी किए जा रहे हैं, इससे यमुना का भंडार क्षेत्र भी कम हो रहा है ।

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