एमवीडीए स्वंय निर्मित बिल्डिंग की जर्जरता पर बनी बेपरवाह
एमवीडीए स्वंय निर्मित बिल्डिंग की जर्जरता पर बनी बेपरवाह
-विकास बाजार में हैं लगभग 250 दुकान, भय के साए में व्यापार करने को विवश हैं दुकानदार
मथुरा । ब्रज में कहावत है "का बरसा जब कृषि सुखनी" यानी खेती सूखने के बाद बरसात का फायदा नहीं रहता है, लापरवाही से हुए हादसों के बाद दिखाई जाने वाली सतर्कता और तेजी के बेमानी हो जाती है, महानगर में खुद सरकार की अपनी कई बिल्डिंग ऐसी हैं जो कभी भी जमीदोज हो सकती हैं, लगातार शिकायतों के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, राधिका विहार स्थित कृष्णा विहार कालोनी में ओवर हेड पानी की टंकी के अचानक ढहने के बाद से ही नगर निगम की कार्यशैली कटघरे में आ गई है जबकि शहर में निगम और एमवीडीए के ही ऐसे कई भवन जर्जर हालत में पहुंच गए है, जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं ।
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नगर निगम में जर्जर भवनों की सूची तो बनती है लेकिन यह कागजों तक ही सीमित रहती है, इतना ही नहीं जिन दुकानों से लाखों रुपए का राजस्व मिलता है, उनकी स्थिति भी जानने के लिए अधिकारियों के पास समय नहीं है, इन्हीं बिल्डिंगों में शामिल है करीब 35 वर्ष पुराने हो चुके हैं, 1988 में एमवीडीए द्वारा शहर के बीचों बीच बनाई गई विकास मार्केट अपने अंतिम समय से जूझ रही है, बरसात के मौसम में दुकानदार भय के साये में अपना व्यापार करते है, दुकानदारो का कहना है की निगम लाखों रूपये का टैक्स वसूली करती है, इमारत की हालत ऐसी है कि कभी भी हादसा हो सकता है ।
दुकानदारों का कहना है कि छत पर वर्षा का पानी भरा रहता है, नींव कमजोर होती जा रही है, आये दिन इमारत का कोई न कोई हिस्सा गिर जाता है जिससे कई दुकानदार और ग्राहक चोटिल होने से बचे हैं, विकास बाजार व्यवसाय समिति के सदस्य डा0 संजय गौड़ का कहना है, हाल ही में नगर निगम को 28 लाख रुपये का टैक्स जमा किया है लेकिन निगम द्वारा कोई सुविधा नहीं जाती है, दुकानदार अपने पैसे से ही मरम्मत कराते हैं, एमवीडीए में वीसी को कई बार शिकायत की गयी है लेकिन कोई सुनवाई नही की जाती है, मोबाईल विक्रेता योगेश यादव का कहना है बरामदों के प्लास्टर उखड़ने लगे हैं जो राहगीरों के ऊपर गिरने से कई बार चोटिल हुए हैं, 90 प्रतिशत दुकानंे किराये पर चल रही हैं, दुकान मालिक दुकान की मरम्मत का कार्य नहीं कराता है ।







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