ब्रजवासियों को परंपरागत मंचीय कौशल दिला रहा रोजगार
ब्रजवासियों को परंपरागत मंचीय कौशल दिला रहा रोजगार
-गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी में दिया जा रहा है प्रशिक्षण
मथुरा । हिन्दू पंचांग के सातवें माह आश्विन मास को क्वार भी कहा जाता है, ब्रज में अधिकांश लोग क्वार ही जातने है, इस मास में अनेक व्रत एवं त्योहार आते हैं, क्वार मास ब्रज में लोककला का आईपीएल लेकर आता है, इंडियन प्रीमियर लीग की तरह क्वार के महीने में ब्रज के तमाम छोटे बडे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराता है, इन छोटे बडे मंचों से निकले कलाकार देश विदेश तक अपने हुनर का लोहा मनवा रहे हैं, ब्रज की रासलीला के कलाकार भी रामलीला के मंच से ही निकले हैं और अब रासलीला के कलाकारों को मिल रहे रोजगार ने रामलीला के कलाकारों में भी जोश ला दिया है ।.png)
ब्रज के गांव देहात में नियमित रूप से रामलीला के वार्षिक आयोजन होते हैं, इनमें से कई परंपरागत आयोजन दशकों पुराने हैं तो कई गावों में यह परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है, रामलीला आयोजन की परंपरा को ग्रामीण पूरी आस्था से निर्वाह कर रहे हैं, अब कला कौशल को रोजगार से जोड़ने की सरकार ने पहल की है, कला व संस्कृति को स्वरोजगार से जोड़ने की राज्य सरकार की नयी नीति के अंतर्गत उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन में इसके लिए नियमित तौर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, एक माह की रासलीला प्रशिक्षण कार्यशाला चलाई जाती है।
यह प्रशिक्षण प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के तहत स्थापित भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ, भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ और गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, वृंदावन द्वारा संयुक्त रूप से दिया जा रहा है, ये कार्यशाला गीता शोध संस्थान एंव रासलीला अकादमी वृंदावन में होती हैं, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के विशेषज्ञ व कलाकार कत्थक शैली में मंचन व नृत्य आदि सिखाते हैं जबकि ब्रज के प्रमुख रासाचार्य व रास के अन्य कलाकार प्रशिक्षणार्थी बच्चों को रासलीला मंचन की अन्य विधाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं ।












