डीएलएड पाठ्यक्रम से छात्रों का होता जा रहा है मोहभंग
डीएलएड पाठ्यक्रम से छात्रों का होता जा रहा है मोहभंग
-उत्तर प्रदेश के बाद अब अन्य राज्यों के छात्र भी बना रहे डीएलएड से दूरी
फरह (मथुरा) । प्राथमिक अध्यापक भर्ती का पाठ्यक्रम डीएलएड दुर्दिनो के दौर से गुजर रहा है, हाल यह है कि आधी सीट दो साल से रिक्त जा रही हैं, डीएलएड कोर्स प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक बनने की अनिवार्य प्रशैक्षणिक योग्यता है, पूर्व में इसे बीटीसी के नाम से जाना जाता था, एक समय था कि एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की कतार लगी रहती थी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश मिलना श्रेष्ठ योग्यता की निशानी मानी जाती थी ।(51).jpg)
अब हाल यह है कि डायट की भी आधी से ज्यादा सीट खाली जा रही हैं, 2023 से अन्य प्रांतों के अभ्यर्थियों के लिए डीएलएड में प्रवेश के द्वार खोले तो कालजे संचालकों की बांछे खिल उठी, इस उम्मीद में कि अब संभवत सभी सीट भर जाएंगी, 2023 और 2024 के सेशन में कुछ अंतर दिखा भी लेकिन 2026 में फिर वही पुरानी स्थिति वापस हो गई, इसके पीछे पीएनपी की भूमिका ज्यादा मानी जा रही है, पिछले साल से डीएलएड के खराब रिजल्ट ने अन्य प्रांतों के छात्रों को मायूस कर दिया है ।(49).jpg)
खासकर बिहार के छात्रों से यहां की ज्यादातर सीटें भरी जा रही थी लेकिन डीएलएड में चालीस से पचास फीसदी रिजल्ट रहने से बाह्य प्रांतों के छात्र मध्य प्रदेश और हरियाणा की ओर मुखातिब होने लगे है, वर्तमान में प्रदेश में डीएलएड अल्पसंख्यक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है, इन सीटों पर पिछले दो साल पूर्व तक मारामारी रहती थी, अब इन सीटों पर कही कही सन्नाटे की स्थिति है, वरिष्ठ प्रवक्ता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जेपी सुमन का कहना है कि युवाओं का डीएलएड कोर्स के प्रति रुझान पहले की अपेक्षा कम है, डायट की सीटें पूर्णरूप से नहीं भरी गई हैं लेकिन आगे रुझान बढ़ने की संभावना है ।















