तीन कार्यकाल, अनगिनत घोषणाएँ और अधूरी ज़मीनी हकीकत

तीन कार्यकाल, अनगिनत घोषणाएँ और अधूरी ज़मीनी हकीकत
संसदीय क्षेत्र मथुरा की भाजपा सांसद हेमामालिनी पर जनता का बढ़ता आक्रोश
  (संवाददाता आलोक तिवारी)
मथुरा। लोकसभा क्षेत्र मथुरा से लगातार तीन बार सांसद चुनी गईं हेमा मालिनी को जनता ने भरोसे के साथ प्रतिनिधित्व सौंपा, लेकिन तीसरे कार्यकाल के बाद भी मथुरा की जमीनी तस्वीर बदहाली, अव्यवस्था और उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। विकास के बड़े-बड़े दावे, घोषणाओं की चमक और पर्यटन की ब्रांडिंग के बीच स्थानीय नागरिक खुद को हाशिये पर खड़ा महसूस कर रहे हैं।

गोद लिया गांव—नाम मात्र की संवेदनशीलता
सांसद द्वारा गोद लिया गया गांव आज भी बदहाल सड़कों,अधूरी नालियों,पेयजल संकट,स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गोद लेने की औपचारिकता तो निभाई गई, लेकिन गांव की किस्मत संवारने की जिम्मेदारी कहीं खो गई। यह सवाल उठता है कि जब गोद लिया गांव ही विकास की राह नहीं देख पाया, तो पूरे संसदीय क्षेत्र का हाल कैसा होगा?

पर्यटन बनाम स्थानीय नागरिक—किसके लिए विकास?

सरकार और सांसद की प्राथमिकता में मथुरा लगातार “पर्यटक स्थल” के रूप में पेश किया जाता रहा, लेकिन ट्रैफिक जाम,गंदगी,जलभराव,स्वास्थ्य सेवाओं की कमी,जैसी समस्याएँ आज भी आम नागरिक झेल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घोषणाएँ पर्यटकों के लिए होती हैं, लेकिन भुगतना स्थानीय नागरिकों को पड़ता है।

मंकी सफारी: चुनावी जुमला साबित हुई घोषणा

मथुरा में मंकी सफारी जैसी योजनाएँ चुनावी मौसम में सुर्खियों में रहीं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह घोषणा सिर्फ जुमला बनकर रह गई। न तो परियोजना आगे बढ़ी, न ही इससे रोजगार या विकास का कोई ठोस खाका सामने आया।
यमुना, स्वास्थ्य और रोजगार—तीनों मोर्चों पर नाकामी,यमुना शुद्धिकरण आज भी फाइलों में कैद है,गंभीर मरीजों को अब भी आगरा और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है,युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार या उद्योग की कोई बड़ी पहल दिखाई नहीं देती 

जनता का आरोप—सांसद का जुड़ाव कम, घोषणाएँ ज्यादा

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि सांसद का जनसंपर्क सीमित, जमीनी मौजूदगी कमजोर और समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता कम दिखाई देती है। संसद से लेकर सड़क तक, जनता के सवालों का ठोस जवाब आज तक नहीं मिला। मथुरा की जनता अब यह पूछ रही है—क्या तीन बार का जनादेश सिर्फ घोषणाओं के लिए था?,क्या आस्था की नगरी सिर्फ पोस्टर और प्रोजेक्ट का विषय बनकर रह जाएगी?,जनता का साफ कहना है—मथुरा को सिर्फ पर्यटन नहीं, नागरिक सुविधाएँ, रोजगार और सम्मान चाहिए,अब इंतज़ार नहीं, जवाबदेही का समय है।

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