19 अप्रैल को उच्च राशि में रहेंगे दोनों ग्रह सूर्य और चन्द्रमा

19 अप्रैल को उच्च राशि में रहेंगे दोनों ग्रह सूर्य और चन्द्रमा 
  मथुरा । श्री दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, इस दौरान उन्होंने कहा कि स्नान दान धर्म-कर्म का महापर्व अक्षय तृतीया स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, इस दिन से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे सूर्य व चंद्रमा दोनों ग्रह उच्च राशि में होने से महापर्व की महिमा और भी अधिक बढ़ गई है, अक्षय तृतीया एक युगादि तिथि है, इस दिन दान धर्म-कर्म, पूजा पाठ अनुष्ठान आदि धार्मिक कार्यों को करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है और परिवार में सुख समृद्धि ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 
  आचार्य ब्रजेन्द्र नागर एवं ज्योतिषाचार्य दीपक चतुर्वेदी ने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ है जो कि चिरंजीवी हैं इस दिन सतयुग का अंत और त्रेता युग प्रारम्भ हुआ था, भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इस दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर प्रवाहित हुई थी। महाभारत काल में वनवास में सूर्यदेव ने पांडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया था जिससे उन्हें भोजन की कभी कमी नहीं हुई। श्री कृष्ण ने अपने प्रिय मित्र सुदामा की गरीबी भी इसी अक्षय तृतीया की पावन तिथि पर दूर की थी।
   उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अत्यंत ही महत्वपूर्ण दिन है इस दिन जाप पूजन हवन घर्म कर्म अनुष्ठान स्नान दान आदि करने से अनंत फल प्राप्त होता है, गोष्ठी में साहित्याचार्य शरद चतुर्वेदी,पं0 नारायण प्रसाद शर्मा ने कहा कि अक्षय तृतीया पर सभी मन्दिरों में विशेष दर्शन होते हैं इसी दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाते हैं, श्रीधाम वृन्दावन में बिहारी जी के अतिरिक्त ब्रज के अनेक मन्दिरों में विशेष दर्शन होते हैं भगवान को अनेक व्यंजनों के साथ सतुआ और शर्बत का विशेष भोग लगाया जाता है जिसका श्रद्धालु भक्त लाभ लेते हैं ।
  इस अवसर पर आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री, सौरभ शास्त्री, पंडित पंकज शास्त्री,ऋषभ देव, गोविंद देव, मनोज पाठक, मनीष पाठक, निरंजन शास्त्री, प्रियांशु आदि ने भी अक्षय तृतीया के पौराणिक व धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मान्यताओं के अनुसार इसी दिन श्री गणेश जी ने वेदव्यास जी द्वारा महाभारत का लेखन प्रारम्भ किया था, उन्होंने कहा अक्षय तृतीया धन समृद्धि,सुख शांति ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सभी मांगलिक कार्यों के लिए अक्षय तृतीया सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त माना गया है ।

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