विशेष रिपोर्ट : एयरपोर्ट पर ‘बार आईडी’ विवाद

विशेष रिपोर्ट : एयरपोर्ट पर ‘बार आईडी’ विवाद
एयरपोर्ट पर ‘बार आईडी’ विवाद : नियम एक, व्यवहार दूसरा
   हाल ही में देश के कई हवाई अड्डों पर यात्रियों विशेषकर अधिवक्ताओं को उस समय असुविधा का सामना करना पड़ा जब सुरक्षा कर्मियों ने बार काउंसिल द्वारा जारी पहचान पत्र (बार आईडी) को मान्य पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने से इंकार कर दिया, यह विवाद तब और गहरा गया जब इसे नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (ब्यूरो ऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी- बीसीएएस ) की गाइडलाइनों के संदर्भ में देखा गया।
  ✦ क्या कहते हैं नियम ?
   बीसीएएस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, हवाई अड्डों में प्रवेश और चेक-इन के लिए कुछ निर्धारित पहचान पत्र ही मान्य होते हैं। इनमें पासपोर्ट, वोटर आईडी, आधार, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी/पीएसयू आईडी, छात्र पहचान पत्र आदि शामिल हैं, इन नियमों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्री की पहचान सत्यापित हो सके, टिकट और पहचान में नाम का मिलान हो, सुरक्षा में किसी प्रकार की ढील न रहे
 ✦ बार आईडी क्यों नहीं माना गया ?
   उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों और आरटीआई से जुड़े तथ्यों के अनुसार, बार काउंसिल या अन्य पेशेवर संस्थाओं द्वारा जारी पहचान पत्रों को एयरपोर्ट एंट्री के लिए मान्य सूची में शामिल नहीं किया गया है यानी भले ही बार आईडी एक वैध पेशेवर पहचान हो लेकिन यह बीसीएएएस की स्वीकृत सूची में नहीं आता इसलिए सुरक्षा एजेंसियां (जैसे सीआईएसएफ़ ) इसे स्वीकार नहीं करतीं
  ✦ ज़मीनी हकीकत बनाम नियम
   इस मुद्दे में सबसे बड़ी समस्या “नियमों की अस्पष्ट समझ” और “व्यवहारिक असंगति” है:
  1- जागरूकता की कमी
  कई यात्रियों विशेषकर अधिवक्ताओं को यह जानकारी नहीं होती कि बार आईडी एयरपोर्ट के लिए वैध नहीं है।
   2- पूर्व में विरोधाभासी संकेत
  कुछ पुराने पत्राचार या स्थानीय स्तर पर ढील के कारण यह धारणा बनी कि बार आईडी स्वीकार हो सकता है जिससे भ्रम पैदा हुआ।
  3- सख्त बनाम लचीला रवैया
  कुछ एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा अधिकारी सख्ती से बीसीएएएस सूची का पालन करते हैं जबकि कहीं-कहीं लचीलापन दिखाया जाता है, यही असंगति विवाद का कारण बनती है।
  ✦ क्या यह उचित है ? एक आलोचनात्मक दृष्टि 
  @सुरक्षा के दृष्टिकोण से
  * बीसीएएएस की सीमित सूची रखना उचित है
  * इससे फर्जी पहचान और सुरक्षा जोखिम कम होते हैं
  @व्यावहारिक दृष्टिकोण से
  * बार काउंसिल आईडी एक सरकारी मान्यता प्राप्त पेशेवर पहचान है
 * इसे पूरी तरह अस्वीकार करना कई बार “अतिसख्ती” जैसा लगता है
 √संतुलित समाधान क्या हो सकता है ?
* बीसीएएस को अपनी सूची समय-समय पर अपडेट करनी चाहिए
* पेशेवर संस्थाओं के आईडी को सत्यापन योग्य बनाकर शामिल किया जा सकता है
* एयरपोर्ट पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएँ
✦ निष्कर्ष : बार आईडी को लेकर एयरपोर्ट सुरक्षा पर उठा विवाद यह दर्शाता है कि नीतियों और उनके क्रियान्वयन के बीच अंतर अभी भी मौजूद है, जहाँ एक ओर सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर यात्रियों की सुविधा और स्पष्टता भी उतनी ही आवश्यक है, यदि इस मुद्दे पर समय रहते स्पष्ट और एकरूप दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए तो ऐसे विवाद आगे भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनते रहेंगे ।
  साभार : शिखर अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ ।

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