सीएटीसी 48 ड्रोन प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स ने किया प्रतिभाग
सीएटीसी 48 ड्रोन प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स ने किया प्रतिभाग
मथुरा । 11 यू.पी. बटालियन एनसीसी द्वारा कैम्प कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विक्रांत त्यागी के निर्देशन में आयोजित सीएटीसी-48 ड्रोन प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन कैडेट्स को ड्रोन संचालन एवं आधुनिक ड्रोन तकनीक का गहन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, 9 सितम्बर 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य कैडेट्स को ड्रोन तकनीक के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के साथ-साथ उनमें तकनीकी दक्षता, एकाग्रता, अनुशासन एवं व्यावहारिक कौशल का विकास करना है ।
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शिविर के तीसरे दिन के प्रशिक्षण सत्र में कैडेट्स को ‘उड़ान के मूल सिद्धांत’ विषय के अंतर्गत ड्रोन की उड़ान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं, प्रशिक्षकों ने कैडेट्स को ड्रोन के उड़ान भरने, उतरने तथा सुरक्षित वापसी प्रणाली के बारे में विस्तार से समझाया, कैडेट्स को बताया गया कि ड्रोन के सफल एवं सुरक्षित संचालन के लिए उड़ान से पहले की तैयारी, नियंत्रण प्रणाली की समझ तथा उड़ान के दौरान उचित निर्णय लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है, प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन की स्थिरता एवं नियंत्रण प्रणाली पर भी विशेष रूप से जानकारी दी गई ।
कैडेट्स को समझाया गया कि ड्रोन किस प्रकार अपने संतुलन को बनाए रखता है और पायलट द्वारा दिए गए नियंत्रण निर्देशों के अनुसार अपनी दिशा, ऊंचाई एवं गति में परिवर्तन करता है, ड्रोन में लगे विभिन्न सेंसर एवं नियंत्रण प्रणालियों की भूमिका के बारे में भी कैडेट्स को जानकारी प्रदान की गई, साथ ही कैडेट्स को मौसम विज्ञान एवं वायुमंडलीय परिस्थितियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, विशेषज्ञों ने बताया कि हवा की गति एवं दिशा, तापमान तथा अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियां ड्रोन की उड़ान को प्रभावित कर सकती हैं इसलिए ड्रोन उड़ाने से पहले मौसम एवं वातावरण का आकलन करना सुरक्षित उड़ान के लिए आवश्यक है ।
ड्रोन प्रशिक्षण विशेषज्ञ नायक सूबेदार चंद्रसेन सिंह एवं हवलदार संतोष ने कैडेट्स को ड्रोन के विभिन्न भागों एवं उनकी कार्यप्रणाली के बारे में बारीकी से जानकारी दी, उन्होंने ड्रोन की संरचना, उड़ान प्रणाली, ऊर्जा आपूर्ति, नियंत्रण प्रणाली, सेंसर तथा अन्य प्रमुख उपकरणों के कार्यों को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया, प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को तकनीकी विषयों की जानकारी के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग से भी परिचित कराया गया, प्रशिक्षण की विशेषता यह रही कि कैडेट्स को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई बल्कि उन्हें अपने प्रश्न पूछने एवं तकनीकी विषयों से संबंधित शंकाओं का समाधान प्राप्त करने का भी अवसर दिया गया ।







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