स्वामी हरिदास ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को प्रदान की नई राह
स्वामी हरिदास ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को प्रदान की नई राह
वृंदावन । अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में ठाकुर राधा सनेहबिहारी मंदिर में आयोजित अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं सम्मान समारोह के दूसरे दिन सोमवार को शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य और वाद्य संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियों ने वृंदावन की आध्यात्मिक धरती को सुर, ताल और भक्ति से सराबोर कर दिया, देश-विदेश में अपनी कला की छाप छोड़ चुके कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह में उपस्थित संगीत प्रेमियों को देर रात तक मंत्रमुग्ध किए रखा। .jpg)
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक श्रीकांत शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, इस दौरान उन्होंने कहा कि वृंदावन केवल भक्ति और आस्था की भूमि ही नहीं, बल्कि संगीत और कला की भी पावन धरती है, स्वामी हरिदास ने अपनी साधना और संगीत के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं, संस्था के अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन का उद्देश्य संगीत, नृत्य और संस्कृति की उस महान परंपरा को आगे बढ़ाना है जिसकी जड़ें वृंदावन की भक्ति परंपरा में गहराई से जुड़ी हैं।
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों ने शास्त्रीय गायन, कथक नृत्य और वाद्य संगीत की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं, कलाकारों ने अपनी साधना और कला का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करते हुए वातावरण को भक्तिमय बना दिया, गीत, संगीत और नृत्य की त्रिवेणी में डूबे दर्शक कलाकारों की प्रस्तुतियों पर लगातार तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन करते रहे, वृंदावन की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और मंदिर परिसर का वातावरण शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों से गुंजायमान रहा, बिहारी लाल वशिष्ठ, संयोजक आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, बलराम आचार्य, हरि कृष्ण शर्मा, कृष्णमुरारी शर्मा, नकुल शर्मा, प्रदीप गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, बालकृष्ण शर्मा बालो, अनिल शास्त्री, रामबाबू शर्मा आदि उपस्थित रहे ।


















