गोवर्धन तहसील में तैनात लेखपालों की कार्यशैली बनी विवादस्पद
गोवर्धन तहसील में तैनात लेखपालों की कार्यशैली बनी विवादस्पद
-बंटवारे के 91 मामलों में सालों से दाखिल नहीं किए कुरेजात, हो चुके हैं प्रारंभिक आदेश
मथुरा । जनपद की गोवर्धन तहसील में तैनात पटवारी अधिकारियों के आदेशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे, एसडीएम न्यायिक की कोर्ट में विचाराधीन करीब 300 मामलों में 91 मामले सिर्फ पटवारियों की लापरवाही से ही अटके हुए हैं, प्रारंभिक डिग्री बनने के बाद भी सालों से केवल कुरेजात दाखिल करने के चलते इतने मुकदमे अटके हैं, भाई-भाई के बंटवारे के आधे से ज्यादा वाद कुरे दाखिल होते ही निपट जाएंगे, एडीएम जे ने एसडीएम गोवर्धन को लेखपालों द्वारा शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, शिथिलता एवं अरुचि का द्योतक बताते हुए द्वितीय अनुस्मारक भेजा है ।
उल्लेखनीय है कि धारा 116 में आपसी शामिल खाते की एवं बेची गई जमीन के बंटवारे के मुकदमे चलते हैं, प्रारंभिक डिग्री बनने के बाद लेखपालों को अच्छे और खराब दोनों श्रेणियों की जमीन में बटाईदार का हिस्सा निर्धारित करना होता है, बंटवारे में यह भी ध्यान रखना होता है कि जमीन के अंश निर्धारण से कोई काश्तकार चकरोड या सिंचाई की नाली आदि से वंचित नही रह जाए, कुरे दाखिल करने के बाद भी सभी काश्तकारों का सहमत होना आवश्यक है, कानूनी प्रक्रिया में कुरे दाखिल होने के बाद काफी मामलों का निपटारा हो जाता है ।
एसडीएम न्यायिक ने 26 मई को द्वितीय अनुस्मारक भेजा है यानी कई माह से उनके आदेशों को नजरअंदाज किया जा रहा है, इन मुकदमों में कई 2019 और 2022 के भी हैं, गौरतलब हो कि कुरे दाखिल करने में भी पटवारी किसानों के साथ खेल करते हैं, इनमें बरसाना, जमुनावता, रसूलपुर, डहरौली के आदि के तमाम मामले उदाहरण के रूप में काफी हैं, कुल लम्बित मामलों की बात करें तो बरसाना एवं आन्योर के 8-8, अड़ींग के 5, बछगांव 4, कमई 5, रसूलपुर 5, राधा कुण्ड 4, मगोर्रा 4 सहित कुल 91 मामले लम्बित कर रखे हैं ।
वहीं गौरतलब यह भी है कि गोवर्धन तहसील में कई लेखपाल 10 साल से भी ज्यादा समय से तैनात हैं, कुछ तो पटवारी कम प्रापर्टी डीलर की भी भूमिका निभा रहे हैं, करोड़ों के खेल झटपट करा देते हैं, गांव देहात में जमीनों का काम करने वाले दलालों का काम भी छीन लिया है, कई लेखपालों ने अकूत सम्पत्ति भी बना ली है, अफसरों को गुमराह करने में यह माहिर हैं लेकिन पटवारी इस मामले में भी अफसरों पर भारी पड़ रहे हैं ।







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