जवाहरबाग कांड : आज भी ताजा हैं मथुरा के मस्तिष्क में स्मृतियां
जवाहरबाग कांड : आज भी ताजा हैं मथुरा के मस्तिष्क में स्मृतियां
-मथुरा की इस वीभत्स घटना में दो पुलिस अधिकारियों ने दी थी शहादत
-जबाहर बाग काण्ड ने उत्तर प्रदेश की व्यवस्था पर खड़े कर दिये थे कई अनसुलझे सवाल
मथुरा । मथुरा के जवाहर बाग कांड को आज 10 साल हो गए हैं, 2 जून 2016 को जवाहर बाग में करीब 3 घंटे तक चली हिंसक झड़प में 2 पुलिस अधिकारियों ने शहादत दी थी, वहीं 40 पुलिस कर्मी घायल हुए थे, वहीं 27 कथित सत्याग्रहियों की भी जानें गईं, आज भी इस वीभत्स कांड की स्मृतियां मथुरा के मस्तिष्क में ताजा हैं, 10 साल बाद भी कई सवाल अनउत्तरित हैं, 2 जून 2016 को मथुरा की इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था ।
इस घटना में उत्तर प्रदेश पुलिस के जांबाज अधिकारी सहित कई पुलिसकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, शहीदों के परिजनों के दिलों में आज भी वही पीड़ा, वही इंतज़ार और वही सवाल जिंदा हैं, यह एक दशक सिर्फ समय का नहीं, बल्कि दर्द, निराशा और टूटती उम्मीदों का दशक रहा है, शहीद मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी के भावनात्मक शब्द आज भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, उनका कहना है कि बिछोह का दर्द तो कभी कम नहीं हो सकता लेकिन उससे भी बड़ा दुख यह है कि शहादत को वह सम्मान और न्याय नहीं मिल सका जिसकी उम्मीद थी ।
शहीद परिवारों को 10 साल बाद भी न्याय और सम्मान का इंतजार है, शहीदों के सम्मान में स्मारक की घोषणा की गई थी लेकिन अभी तक इसके पूरा होने का इंतजार है, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली सरकार से एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि शहीदों के सम्मान में ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके, आज इस घटना की बरसी पर पूरा मथुरा उन वीर सपूतों को नमन कर रहा है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कर्तव्य को सर्वाेपरि रखा ।







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