देश आजादी के बाद मथुरा जेल में किसी महिला को नहीं दी गई फांसी
देश आजादी के बाद मथुरा जेल में किसी महिला को नहीं दी गई फांसी
-मथुरा जेल में है उत्तर प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर, 1870 में बना था यह
मथुरा । उत्तर प्रदेश में जब भी किसी महिला को फांसी की सजा होती है तो मथुरा जिला जेल का जिक्र जरूर होता है, आजाद भारत (1947) के बाद से अभी तक मथुरा जेल में किसी भी महिला को फांसी नहीं दी गई है, मथुरा जेल के रिकॉर्ड के अनुसार 1947 के बाद से इस जेल में बने विशेष महिला फांसी घर का उपयोग किसी भी महिला को फांसी देने के लिए नहीं किया गया है, मथुरा जेल में उत्तर प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर मौजूद है जिसे 1870 में ब्रिटिश शासन के समय में बनवाया गया था ।.png)
मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है, इसमें मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जाएगी, यहां प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर है, सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी, पूर्व जिलाधिकारी बताते हैं कि जेल मैन्यूल 1956 में मथुरा की जेल में बने इस महिला फांसी घर का जिक्र किया गया है, जेल मैन्यूल में यह कहा गया है कि मथुरा जेल में बने इस महिला फांसी घर में सिर्फ महिलाओं को ही फांसी दी जाएगी, यह अलग बात है कि अभी तक फांसी किसी को नहीं दी गई है, ऐन वक्त पर रामकली की फांसी को उम्र कैद में बदल दिया गया था, वर्ना वो पहली महिला होती जिसे फांसी दी जाती ।
मथुरा जेल में यह फांसी घर 150 साल पुराना है, लकड़ी का दरवाजा गल चुका है, दीवारें भी गिरासू हैं, अंदर झाड़ियां उग आई हैं, फांसी देने वाला लीवर भी गल चुका है, लकड़ी के तख्तें भी गले हुए हैं, अब तो तख्तों पर मिट्टी पड़ चुकी है, सूत्रों की मानें तो जेल में तैनात रहे किसी अधिकारी ने भी कभी फांसी घर के अंदर जाने की कोशिश नहीं की है, रोज़ रात के वक्त वहां लगे बल्ब को जलाने के अलावा कोई ऐसा काम नहीं है जो अब रोज़ाना किया जाता हो, हाल के सालों में शबनम और मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान जैसे मामलों में मथुरा जेल में फांसी दिए जाने की चर्चाएं जरूर रही हैं लेकिन जेल रिकार्ड के अनुसार अभी तक किसी भी महिला को यहां फांसी नहीं दी गई है ।
मथुरा यूपी का इकलौता ऐसा फांसी घर है जो सिर्फ महिलाओं के लिए ही बनाया गया है, हालांकि 150 साल पुरानी इस जेल में आज़ादी मिलने के बाद से अभी तक किसी भी महिला को फांसी नहीं दी गई है, मथुरा की जेल के आधा बीघा क्षेत्र में बने इस फांसी घर में सिर्फ महिलाओं को ही फांसी दी जाएगी, महिला और पुरुष को फांसी देने के तरीके में कोई फर्क नहीं है, सिवाय इसके कि पुरुष को पुलिस वाले पकड़कर लाते हैं और महिला को महिला कांस्टेबल पकड़कर लाती हैं तो फिर ऐसा क्यों कि इस फांसी घर में सिर्फ महिलाओं को ही फांसी दी जाएगी, यह सवाल जल्लाद मथुरा जेल के अधिकारियों से कर चुका है लेकिन उसके इस सवाल का किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया ।













