मौसम के बिगडे मिजाज ने किसानों को हो रही मुश्किल
मौसम के बिगडे मिजाज ने किसानों को हो रही मुश्किल
-खेत से मंडी तक बढी मुशीबत, किसानों के माथे पर छाये चिंता के बादल
मथुरा । अचानक बारिश ने मौसम में भले तल्खी को कम किया हो, लोगो की गर्मी को बढ़ा दिया है, किसान अभी सरसों की बुवाई में जुटे थे, कल तक खेतों की जुताई और बुवाई की जा रही थी लेकिन गुरुवार को अचानक झमाझम बारिश ने नजारा बदल दिया, दो दिन पहले बुवाई वाले खेत बारिश की चपेट में आ गए, किसान वासुदेव, सोनू, देवेंद्र, बीरू, हरिओम सिंह, सोमवीर सिंह आदि का कहना है कि बारिश से बड़े नुकसान की आशंका है ।.png)
सरसों के खेत बिखर गए हैं, जो उम्मीद इस बार लगाई जा रही थी, पानी में बह गई है, कई खेतों में पानी भी भर गया है, अब दोबारा से खेत बोने के लिए किसानों को दोहरा खर्च और समय व्यतीत करना पड़ेगा, किसानों के अनुसार, गुरुवार से लगातार हो रही बारिश के कारण मंडी परिसर में पानी भर गया जिससे धान और बाजरे की उपज प्रभावित हुई है, किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं लेकिन वहां फसल को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उनकी उपज बारिश में भीग रही है। 
किसानों का कहना है कि मंडी में आढ़तियों और क्रय केंद्रों पर लाई जाने वाली उपज को दिन हो या रात सड़क पर ही उतरवा दिया जाता है, ऐसे में बारिश होने पर फसल को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है, भीगी हुई फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने की आशंका के चलते किसान आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं, किसानों ने मंडी समिति की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं, उनका आरोप है कि दूर-दराज से उपज लेकर आने वाले किसानों के ठहरने और रात में आराम करने के लिए मंडी में गेस्ट हाउस बनाए गए थे लेकिन उन्हें इन सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है ।
किसानों के मुताबिक, गेस्ट हाउस का उपयोग किसानों के बजाय मंडी समिति के कर्मचारी कर रहे हैं जिसके चलते किसानों को ठहरने में परेशानी होती है, बारिश और जलभराव से परेशान किसानों ने मंडी परिसर में जल निकासी की उचित व्यवस्था कराने, उपज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने और किसानों के लिए बनाए गए गेस्ट हाउस की सुविधाएं उन्हें मुहैया कराने की मांग की है, अब सवाल यह है कि किसानों की इन समस्याओं को लेकर मंडी प्रशासन कब तक कदम उठाता है और अन्नदाताओं को राहत दिलाने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है ।













