वृंदावन में भगवान जगन्नाथ को भा रहा यमुना तट का सान्निध्य
वृंदावन में भगवान जगन्नाथ को भा रहा यमुना तट का सान्निध्य
- हरे-भरे कुंभ क्षेत्र में अब पांच से बढ़कर सात दिवसीय प्रवास, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
वृंदावन । श्रीकृष्ण की लीला भूमि ब्रज और भगवान जगन्नाथ की पावन नगरी पुरी के बीच आध्यात्मिक संबंधों को साकार करती एक अनूठी धार्मिक यात्रा इन दिनों वृंदावन में श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनी हुई है, नेपाल और श्रीलंका की यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ का वृंदावन प्रवास पांच दिन से बढ़ाकर सात दिन कर दिया गया है, यमुना किनारे वृंदावन कुंभ क्षेत्र स्थित विरजा मंडल में विराजमान महाप्रभु के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं ।.jpg)
वृंदावन में हरियाली से आच्छादित यमुना तट का शांत वातावरण, भजन-कीर्तन और भगवान की दिव्य झांकियां इस धार्मिक आयोजन को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान कर रही हैं, भगवान जगन्नाथ के भव्य डोले के साथ करीब 500 भक्तों का दल इस धर्म यात्रा में शामिल है, यात्रा का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ जी की महिमा और भक्ति का प्रचार-प्रसार करने के साथ विश्व में शांति, सद्भाव और मैत्री का संदेश देना भी है, श्रीकृष्ण की लीला भूमि वृंदावन में महाप्रभु का प्रवास ब्रज और पुरी की समृद्ध धार्मिक परंपराओं के संगम का अनुभव करा रहा है ।
कुंभ क्षेत्र स्थित विरजा मंडल में स्कंद पुराण में वर्णित भगवान जगन्नाथ की महिमा का वर्णन कथा के माध्यम से किया जा रहा है, संत सत्यानंद महाराज, दीनबंधु महाराज, परमानंद महाराज और बाबा दयानिधि दास श्रद्धालुओं को महाप्रभु की लीलाओं और उनकी महिमा से परिचित करा रहे हैं, सुबह छह से साढ़े आठ बजे तक और शाम छह से रात नौ बजे तक कथा श्रवण एवं दर्शन का क्रम चल रहा है, दिल्ली, बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन में भाग ले रहे हैं ।
बाबा दयानिधि दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की सेवा परंपरा में विभिन्न अवसरों पर उनके अनेक दिव्य वेशों के दर्शन का विशेष महत्व है, पुरी की परंपराओं से जुड़े इन स्वरूपों में भगवान कभी स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित राजराजेश्वर के रूप में, तो कभी गजानन, राधा-दामोदर, त्रिविक्रम, लक्ष्मी-नारायण और नृसिंह स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसी प्रकार वनभोजी, कालियादलन, कृष्ण-बलराम, रघुनाथ और पद्म वेश भी भगवान की विविध लीलाओं एवं स्वरूपों का स्मरण कराते हैं, वृंदावन में भी भगवान जगन्नाथ के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं ।
उन्होंने बताया, ओडिशा की पारंपरिक सेवा-पद्धति और पूजन विधान के अनुरूप यहां भी महाप्रभु की पूजा-अर्चना की जा रही है, इससे ब्रज में पुरी की धार्मिक परंपराओं का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है, पुरी में महाप्रभु की रथयात्रा और विविध वेशों की परंपरा सदियों से श्रद्धा का केंद्र रही है, वहीं वृंदावन श्रीराधा-कृष्ण की लीलाओं, भजन और संकीर्तन की भूमि है, ऐसे में कुंभ क्षेत्र की हरियाली, यमुना का शांत तट और भक्ति से गुंजायमान वातावरण श्रद्धालुओं को कुछ समय आध्यात्मिक शांति के बीच बिताने का अवसर दे रहा है, यहां पहुंच रहे भक्त भगवान के दर्शन के साथ कथा-श्रवण और संकीर्तन में शामिल होकर स्वयं को भक्ति के रंग में सराबोर कर रहे हैं ।













