ब्रज लीलाओं के श्रद्धालुओं ने किये दर्शन, हुए भावविभोर
ब्रज लीलाओं के श्रद्धालुओं ने किये दर्शन, हुए भावविभोर
-वरुण लोक से नंदबाबा को मुक्त कराने से लेकर ब्रह्मा जी के मोहभंग तक की देखीं लीला
वृंदावन (मथुरा) । श्रीराधारानी ब्रजयात्रा में श्रद्धालुओं ने गर्गाचार्य जी के गांव गांगरोल से प्रस्थान कर भय गांव सहित भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से जुड़े अनेक स्थलों के दर्शन किए, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और उनके सखा ग्वालबालों के साथ हुई लीलाओं की स्मृतियां ताजा होते ही पूरा वातावरण श्रीकृष्णमय हो उठा, भय गांव के नंद घाट पर यात्रियों ने उस लीला का स्मरण किया, जब वरुण के दूत नंदबाबा को यमुना स्नान के दौरान वरुण लोक ले गए थे । (82).jpg)
इस अवसर पर यात्रियों को संबोधित करते हुए मान मंदिर के राधाकांत शास्त्री ने श्रीमद्भागवत में वर्णित ब्रह्मा जी के मोहभंग और वत्सहरण लीला का विस्तार से वर्णन किया, उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं इतनी विलक्षण हैं कि उन्हें देखकर साधारण मनुष्य ही नहीं, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी तक मोहित हो गए, भगवान श्रीकृष्ण ग्वालबालों के साथ वन में गाय-बछड़ों को चराते और अपने सखाओं के साथ उनकी जूठन तक बड़े प्रेम से खाते थे, भगवान की इस सहज बाल लीला को देखकर ब्रह्मा जी के मन में संशय उत्पन्न हो गया, उन्होंने भगवान की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए ग्वालबालों और बछड़ों का हरण कर उन्हें अपने लोक में छिपा दिया।.png)
शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रह्मा जी के इस कृत्य के बावजूद ब्रज में लीला का क्रम बाधित नहीं होने दिया, उन्होंने स्वयं ही सभी ग्वालबालों और बछड़ों के समान रूप धारण कर एक वर्ष तक ब्रजवासियों को पहले जैसा आनंद प्रदान किया, जब ब्रह्मा जी वापस आए तो उन्होंने देखा कि जिन ग्वालबालों और बछड़ों को वे अपने साथ ले गए थे, वे तो भगवान के साथ पहले की तरह ही खेल रहे हैं, यह देखकर उनका सारा अहंकार चूर हो गया, उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की सर्वव्यापकता और परम सत्ता का बोध हुआ, ब्रह्मा जी ने भगवान के चरणों में गिरकर क्षमा याचना की और उनकी स्तुति की ।
राधाकांत शास्त्री ने कहा कि यह लीला संदेश देती है कि भगवान की शक्ति और उनकी लीलाओं को बुद्धि तथा अहंकार से नहीं समझा जा सकता, ब्रज की महिमा ऐसी है कि स्वयं ब्रह्मा जी को भी यहां आकर भगवान की शरण ग्रहण करनी पड़ी, उन्होंने ब्रजभूमि की परिक्रमा और ब्रज की रज के आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला, ब्रजयात्रा में बाबा ब्रजशरण दास, बाबा नरसिंह दास, राधाकांत शास्त्री, ब्रजदास, राजकुमार शास्त्री, महेश शास्त्री सहित अनेक संत, महात्मा और श्रद्धालु यात्रा की अगुवाई कर रहे हैं ।














