पक्षी हैं पर्यावरण से सजग प्रहरी, विलुप्ति बड़े संकट का संकेत

पक्षी हैं पर्यावरण से सजग प्रहरी, विलुप्ति बड़े संकट का संकेत
-जून में भी जोधपुर झाल में विचरण कर रहे विदेशी पक्षी दे रहे बड़े संकेत
   मथुरा । पक्षी पर्यावरण के सजग प्रहरी हैं, करीब 25 प्रतिशत पादप प्रजातियां इन्हीं के सहारे जिंदा हैं, ये मौसमी आपदाओं के संकेतक हैं, जून के महीने में भी असामान्य रूप से जोधपुर झाल में विचरण कर रहे विदेशी मेहमान पक्षी पर्यावरणविदों को जलवायु परिवर्तन का बडा संकेत दे रहे हैं, ये धरती के वे मूक और सच्चे इकोसिस्टम इंजीनियर्स हैं, जो बिना किसी वेतन या स्वार्थ के ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर जंग लड़ रहे हैं, जब ये पंख वाले संरक्षक उड़ते हैं तो अपने साथ जीवन का बीजारोपण करते हैं, बंजर हो चुकी जमीनों को घने वनों में तब्दील कर देते हैं, कीटों से जंगलों की रक्षा करते हैं, वनस्पतियों को नया जीवनदान देते हैं ।
    बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ0 के0 पी0 सिंह के अनुसार जब तक हम इन मूक बागवानों के आशियानों, शाखाओं और उनकी आर्द्रभूमियों को महफूज नहीं करते, तब तक क्लाइमेट एक्शन का हमारा हर संकल्प अधूरा रहेगा, दिवस विशेष की पावन वेला में इन बेजुबान संरक्षकों को बचाने का विचार ही हमारे सुरक्षित और हरे-भरे कल की असली नींव है क्योंकि वे सीधे तौर पर श्प्रकृति से प्रेरितश् समाधानों को धरातल पर उतारते हैं, जलवायु परिवर्तन से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका कार्बन को सोखना है और इसमें पक्षी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसे विज्ञान में एंडोजूकोरी कहा जाता है ।
   कार्बन सोखने वाले विशाल पेड़ों का रोपण बड़े आकार के पक्षी (जैसे हार्नबिल या टूकेन) घने और भारी कार्बन सोखने वाले पेड़ों के फल खाते हैं, जब ये पक्षी उड़ते हैं, तो दूर-दराज के बंजर क्षेत्रों या कटे हुए जंगलों में बीजों को मल के रूप में छोड़ देते हैं, प्राकृतिक खाद और त्वरित अंकुरणरू जब कोई बीज पक्षी के पाचन तंत्र से गुजरता है तो उसके पेट के एंजाइम बीज की कठोर बाहरी परत को हल्का कर देते हैं। इससे वह बीज सामान्य से अधिक तेजी से अंकुरित होता है। साथ ही, पक्षियों की बीट प्राकृतिक नाइट्रोजन युक्त खाद का काम करती है जिससे पौधों को शुरुआती पोषण मिलता है, वनस्पतियों का जीवन चक्र पक्षियों द्वारा होने वाले परागण को विज्ञान की भाषा में आर्निथोफिली कहा जाता है, आंकड़ों के अनुसार विश्व की लगभग 15 से 25 प्रतिशत जंगली पौधों की प्रजातियां पूरी तरह से पक्षियों द्वारा होने वाले परागण पर निर्भर हैं ।

 

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