मथुरा : 70 गांव के किसानों को टोल टैक्स में मिलेगी छूट, फास्टैग होंगे जारी
मथुरा : 70 गांव के किसानों को टोल टैक्स में मिलेगी छूट, फास्टैग होंगे जारी
मथुरा । यमुना एक्सप्रेस वे निर्माण में अपनी जमीन देने वाले किसानों को टोल टैक्स में राहत देने का फैसला लिया गया है, यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए जनपद की मांट और महावन तहसील के 70 गांवों के किसानों से जमीन का अधिग्रहण किया गया था, हालांकि लोगों को इस तरह का भ्रम भी हो रहा है कि जिन गांवों से एक्सप्रेस वे के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उन गावों के किसानों को टोल टैक्स में राहत दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं है, इन गावों के उन्हीं किसानों को यह राहत मिल रही है जिन्होंने एक्सप्रेस से के लिए अपनी जमीन दी है, इससे पहले जनपद में यमुना एक्सप्रेस पर किसी भी तरह के आंदोलन, धरना प्रदर्शन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था ।
एक्सप्रेस वे प्रबंधन ने पात्र किसानों को मुफ्त फास्टैग जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे वे बिना शुल्क दिए आवागमन कर सकेंगे, मथुरा के इन 70 गांवों के किसानों और उनके परिवारों (आश्रितों) को यह सुविधा मिलेगी, टोल प्लाजा पर पात्र किसानों की सूची तैयार कर उन्हें मुफ्त फास्टैग वितरित किए जा रहे है, फास्टैग और टोल पास के लिए किसानों को अपनी जमीन अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज, पहचान पत्र और वाहन की आरसी संबंधित परियोजना कार्यालय या टोल प्लाजा पर जमा कराने होंगे, यमुना एक्सप्रेस-वे का निर्माण वर्ष 2008-09 में हुआ था, इसके लिए मथुरा जनपद के करीब 70 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, इनमें मांट और महावन तहसील के सर्वाधिक किसान शामिल हैं, लंबे समय से किसान एक्सप्रेस-वे पर टोल में छूट की मांग कर रहे थे, इसके लिए जावरा टोल प्लाजा पर पात्र किसानों की सूची तैयार की जा रही है, फास्टैग बनवाने के लिए किसानों को अपनी अधिग्रहित जमीन से संबंधित नक्शा-11, वाहन की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) तथा मतदाता पहचान पत्र जमा करना होगा ।
भारतीय किसान यूनियन चढूनी के प्रदेश मीडिया प्रभारी रामवीर सिंह तोमर का कहना है कि यह छूट एक्सप्रेस वे के लिए जमीन देने वाले गावों के सभी किसानों को मिलनी चाहिए, सभी किसान इसके लिए हकदार हैं, यह एक तरह से किसानों को बांटने जैसा है, इस मांग को संगठन पुरजोर तरीके से उठाएगा, वहीं भारतीय किसान यूनियन सुनील के प्रदेश प्रवक्ता पवन चतुर्वेदी का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस वे निर्माण में सिर्फ उन्हीं किसानों का सहयोग नहीं रहा है जिन्होंने अपनी जमीन अधिग्रहण में दी हैं, बड़ी संख्या में किसानों ने अपने खेतों से मिट्टी भी एक्सप्रेस वे के लिए दी है, अगर ये किसान मिट्टी नही देते तो एक्सप्रेस वे कैसे बनता, जिन खेतों से मिट्टी उठी है उनमें अभी तक फसल ठीक से नहीं हो रही है ।







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