जयकुंड पर महारास की विलुप्त होती जा रही है परंपरा

जयकुंड पर महारास की विलुप्त होती जा रही है परंपरा 
   मथुरा । उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम जैत की कई परंपराएं इतिहास के पन्नों में दफन हो चुकीं हैं। उनमें नाग पंचमी का मेला, शरद पूर्णिमा का महारास, दीपावली का दीपदान आदि प्रमुख हैं, प्रधान प्रतिनिधि संजय सिंह ने बताया है कि ग्राम पंचायत के पास फंडिंग की व्यवस्था नही होने के कारण तुलसी की खेती और कंठी-माला के उद्गम स्थल जैंत गांव का पौराणिक जयकुण्ड उचित रखरखाव के अभाव में पुनः दुर्दशा का शिकार होता जा रहा है। 
   प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि बाउंड्रीवॉल, शौचालय, पेयजल प्याऊ, प्रकाश, परिक्रमा मार्ग, अघासुर, मघासुर, झरना आदि अन्य कलाकृतियों और परंपरागत विभिन्न आयोजनों का उचित संरक्षण नहीं हो पा रहा है, जनश्रुति के आधार पर उन्होंने बताया है कि कालांतर में जैंत में शरद पूर्णिमा पर गांव की परिक्रमा लगाई जाती थी और परिक्रमा के दौरान ही महारास के दर्शन कर भक्ति में भाव विभोर हो जाते थे। महारास की विलुप्त होती परंपरा के संरक्षण के लिए उन्होंने सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों से छह से नौ अक्टूबर के मध्य जय कुंड पर महारास का आयोजन करवाने का अनुरोध किया है।
    पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य रामकुमार सिंह राजावत ने बताया कि बृज का बृज का प्रमुख तीर्थ स्थल जय कुंड एक पौराणिक स्थल ही नहीं अपितु कालिया मर्दन सिद्ध पीठ है। जिन श्रद्धालुओं के मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं वह अपनी श्रृद्धा  अनुसार शरद पूर्णिमा पर भजन कीर्तन, सत्संग, बुहारी-सोहनी सेवा, दण्वती परिक्रमा, दीपदान, साधु सेवा, निर्धन सेवा आदि विभिन्न सेवा प्रकल्पों का आयोजन करते हैं। द बृज फाउंडेशन के प्रयासों के फलस्वरूप ही इस धार्मिक स्थल का सौंदर्यीकरण हुआ है। द बृज फाउंडेशन द्वारा सौंदर्यीकृत कुंड सरकार से तालमेल न बैठने के कारण बदहाल होते जा रहे हैं, उन्होंने उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद् से अनुरोध करते हुए कहा है कि शरद पूर्णिमा से पहले जय कुंड परिक्रमा मार्ग की साफ सफाई और मरम्मत का कार्य करवा दिया जाए जिससे श्रृद्धालुओं को परेशानी का सामना ना करना पड़े ।

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