प्राचीन पांडुलिपियों में प्रयोग होने वाली स्याही की दी गई जानकारी
प्राचीन पांडुलिपियों में प्रयोग होने वाली स्याही की दी गई जानकारी
मथुरा । वृन्दावन शोध संस्थान में बुधवार को ज्ञान भारतम् के संयुक्त तत्वावधान में चल रही पंच दिवसीय संरक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन वरिष्ठ संरक्षक प्रमोद कुमार पाण्डेय और डॉ0 डी0के0 वर्मा ने प्रतिभागियों को संरक्षण कार्य की बारीकियों से अवगत कराया, कार्यशाला के दौरान सर्वप्रथम प्रमोद कुमार पांडेय ने प्राचीन पांडुलिपियों में प्रयोग होने वाली स्याही के विषय में विस्तार से बताया जिसके अंतर्गत स्याही के विभिन्न प्रकार जैसे माही स्याही, आयरन गोल स्याही, कार्बन स्याही, लाल स्याही, गोल्डन, सिल्वर स्याही एवं कत्था स्याही के बारे जानकारी प्रदान की।
उन्होंने पांडुलिपियों पर पड़ने वाले विभिन्न प्रकार के दाग-धब्बों के बारे में भी जानकारी प्रदान की, साथ ही पांडुलिपि संरक्षण की वातावरणीय दशाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई, डॉ. डीके वर्मा ने बताया पुराने समय में पर्चमेंट पेपर, मिट्टी (क्ले), पाम लीफ, बाँस एवं कागज आदि पर लेखन की परंपरा थी, पांडुलिपियों पर प्राकृतिक सामग्री (कैलीग्राफी), हेन्ड कापी, इल्यूमिनेशन आदि तकनीकों से लिखा जाता था, पांडुलिपियों खराब होने के कारण की जानकारी प्रदान दी, साथ ही पांडुलिपियों के प्राथमिक उपचार के बारे में भी जानकारी प्रदान की, प्रिंटिंग के वुड ब्लॉक प्रिंटिंग, लीथोग्राफिक और डिजिटल प्रिंटिंग आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई, प्रशिक्षण के दौरान कल्चर प्रोपर्टी की भी जानकारी दी गई ।







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