श्रीकृष्ण नगरी में निकाली गई सांस्कृतिक शोभायात्रा
श्रीकृष्ण नगरी में निकली सांस्कृतिक शोभायात्रा, लोक रंगों से सराबोर हुई नगरी
-मयूर नृत्य, बीन की धुन, ढोल नगाड़ों की गूंज, विभिन्न क्षेत्रों की लोक कलाओं ने मोहा मन
मथुरा । भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी के उल्लास के बीच गुरुवार को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से निकाली गई, सांस्कृतिक शोभायात्रा के साथ श्रीकृष्णोत्सव के दूसरे दिन का आगाज हुआ, श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य द्वार से शुरू हुई शोभायात्रा में ब्रज की लोक संस्कृति और देश के विभिन्न अंचलों की लोक कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, शोभायात्रा का शुभारम्भ प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिलें मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने किया।

डीएम सीपी सिंह, सीईओ लक्ष्मी नागप्पन तथा श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश चंद्र, सहायक अभियंता जीके. जैन, राजस्व समन्वयक चंद्रिका प्रसाद, समन्वयक चंद्र प्रताप सिकरवार, संस्कार भारती के सुरेंद्र कुमार गुप्ता, मान मंदिर के सुनील सिंह, अनूप शर्मा, मनोज फौजदार ने लोक कलाकारों का उत्साह बढ़ाया, ढोल नगाड़े बजाए ।
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शोभायात्रा में रंग बिरंगी पोशाकों में सजे कलाकारों की टोलियां अद्भुत माहौल बना रही थीं, कहीं बांसुरी की मधुर धुन वातावरण में कृष्ण भक्ति घोल रही थी तो कहीं ढोल-नगाड़ों की थाप पर कलाकार थिरकते नजर आए, मयूर नृत्य ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया, विभिन्न टोलियों द्वारा किए जा रहे संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया, राजस्थानी गुजरियों का नृत्य, रीछ, भालू, लंगूर सहित बहरूपियों की कलाकारी और बीन की मधुर धुन ने भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। 
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मुख्य द्वार से शुरू हुई शोभायात्रा पोतरा कुंड, गोविंद नगर और डीग गेट होते हुए पुनः श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची, रास्ते भर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने लोक कलाकारों का स्वागत किया। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए देश-विदेश से मथुरा पहुंचे श्रद्धालुओं के कदम भी शोभायात्रा को देखकर थम गए। बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे खड़े होकर कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लेते नजर आए, शोभायात्रा में शामिल कलाकारों की अलग-अलग टोलियां ब्रज की पारंपरिक लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती हुई आगे बढ़ती रहीं, कहीं राधा कृष्ण की भक्ति से जुड़े गीत गूंज रहे थे तो कहीं लोक वाद्यों की थाप पर कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। .jpg)







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