बिना स्वीकृति के धड़ल्ले से बन रहे हैं गेस्ट हाउस, आलीशान आश्रम
बिना स्वीकृति के धड़ल्ले से बन रहे हैं गेस्ट हाउस, आलीशान आश्रम
-मुख्यमंत्री को भेजा शिकायती पत्र, जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
मथुरा । जनपद की तहसील सदर और थाना जैंत क्षेत्र में उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के नियमों को ताक पर रखकर मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण से बिना नक्शा पास कराए गेस्ट हाउस और आश्रमों के निर्माण का मामला सामने आया है, प्रियाकांत जू मंदिर से वृंदावन जाने वाले मार्ग, अक्षय पात्र के समीप मां धाम के आसपास, अल्हैपुर-तेहरा मार्ग तथा गणपति से अल्हैपुर जाने वाले मार्ग पर कई निर्माण खड़े होने का आरोप लगाया गया है, इनमें कुछ भवनों में निर्माण कार्य अभी भी जारी बताया जा रहा है। .jpg)
भारतीय किसान यूनियन भानु की पदाधिकारी लक्ष्मी शर्मा ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजा है, आरोप लगाया है कि संबंधित क्षेत्रों में विकास प्राधिकरण की अनुमति और स्वीकृत मानचित्र के बिना कई भवनों का निर्माण कराया गया है, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायत मिलने के बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, उनका आरोप है कि कई भवनों और आश्रमों का इस्तेमाल अब गेस्ट हाउस के रूप में किया जा रहा है, इससे जहां नियमों की अनदेखी का सवाल उठ रहा है, वहीं इन भवनों में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है ।
शिकायत में विशेष रूप से अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि कई भवनों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रियाकांत जू मंदिर-वृंदावन मार्ग, अक्षय पात्र क्षेत्र, अल्हैपुर-तेहरा मार्ग और गणपति-अल्हैपुर मार्ग पर बने गेस्ट हाउस, आश्रमों और अन्य व्यावसायिक भवनों की जांच कराई जाए, साथ ही यह भी जांच हो कि किन भवनों का नक्शा स्वीकृत है और किनका निर्माण बिना अनुमति कराया गया है ।
लक्ष्मी शर्मा ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है, उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होना विभागीय मिलीभगत की आशंका पैदा करता है, उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और निर्माणकर्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की है, अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत के बाद संबंधित विभाग इन कथित अवैध निर्माणों की जांच कब शुरू करता है और नियमों की अनदेखी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होती है ।



















