जिला सूचना अधिकारी कार्यालय मथुरा में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा
जिला सूचना अधिकारी कार्यालय मथुरा में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा
-डीआईओ ने दर्ज कराई संविदा कर्मी कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ रिपोर्ट
मथुरा । जिला सूचना अधिकारी प्रशांत कुमार सुचारी की तहरीर पर जिला सूचना कार्यालय में आउटसोर्सिंग कार्मिक (कम्प्यूटर आपरेटर) के विरूद्ध थाना सदर बाजार में अभियोग पंजीकृत किया गया है, जिला सूचना अधिकारी की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि दो फरवरी 2026 को दोपहर में करीब डेढ बजे सूचना अधिकारी जयेन्द्र सिंह (निदेशालय सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ) के मोबाइल से श्रीमत एवरग्रीन एडवरटाइजिंग प्रा0 लि0 के कार्य सत्यापन प्रमाण पत्र की फोटो उनको भेजी गई जिसे मैंने शाम करीब साढे छह बजे देखा ।
सूचना अधिकारी जयेन्द्र सिंह द्वारा पूछा गया कि यह प्रमाण पत्र आप द्वारा जारी किया गया है अथवा नहीं जिसे मेरे द्वारा देखने के पश्चात पाया गया कि सत्यापन प्रमाण पत्र में दर्शित हस्ताक्षर मेरे द्वारा नहीं किये गये थे, जो पूर्णतया फर्जी थे जिसके सम्बन्ध में उनको व्हाटसअप कॉल कर बता दिया गया, कार्य सत्यापन प्रमाण पत्र में दर्शायी गयी कार्यालय पत्रांक को डिस्पैच पंजिका के अनुसार भी फर्जी पाया गया, यह प्रमाण पत्र 10 जनवरी, 2026 को जिला सूचना कार्यालय मथुरा से कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा भेजा गया था।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, लखनऊ के माध्यम से जनपद में राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के कार्यक्रमों, महोत्सवों व शासकीय योजनाओं के प्रचार कार्य कराए जाते हैं, इन कार्यों के बाद संबंधित फर्मों को भुगतान के लिए जिला सूचना अधिकारी कार्यालय से कार्य सत्यापन प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, जांच के दौरान संबंधित फर्मों से संपर्क किया गया जिनसे जानकारी मिली कि वर्ष 2021 से अब तक कार्यालय से कई सत्यापन प्रमाण पत्र प्राप्त किए गए हैं, इनमें से कम से कम पांच प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं ।
एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि इन प्रमाण पत्रों के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया की जाती रही है जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है, आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर ने जाली हस्ताक्षर, मोहर और डिस्पैच विवरण का उपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराए, मामले में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की धाराओं में केस दर्ज किया गया है, पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना उपनिरीक्षक अरविंद सिंह को सौंपी है, अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य कर्मचारी या फर्मों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, मामले को गंभीर मानते हुए सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों और भुगतान रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है ।







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