गुरू पूर्णिमा : आकर्षण चरम पर है गोवर्धन का मुड़िया मेला
गुरू पूर्णिमा : आकर्षण चरम पर है गोवर्धन का मुड़िया मेला
-470 वर्षों से निभाई जा रही परम्परा, 29 को निकलेगी मुड़िया संतों की शोभायात्रा
मथुरा । मुडिया मेला गुरु शिष्य परंपरा का दुनियाभर में अनूठा उत्सव है, शायद ही गुरू शिष्य परंपरा को समर्पित इतना विशाल आयोजन दुनिया में कहीं देखने को मिलता हो, गुरु पूर्णिमा के दिन सबसे ज्यादा भीड़ गोवर्धन पर्वत की तलहटी में सात कोसी परिक्रमा मार्ग में रहती है, समूचे ब्रज में यह पर्व उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है, इस दिन का विशेष महत्व यह भी है कि शिष्य गुरु से गुरु दीक्षा ग्रहण करते हैं, गुरू पूर्णिमा के दिन मठ, आश्रमों में गुरु गद्दी पर बैठेंगे और शिष्यों को गुरु दक्षिणा देंगे ।
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ब्रज में इस समय जगह-जगह भागवत कथा चल रही है, भागवताचार्यों के अनुयायी बहुतायत में हैं, गोवर्धन में यह मुड़िया मेला के नाम से प्रसिद्ध है, लम्बे समय से प्रशासन यह मानकर चल रहा है कि पांच दिवसीय मुड़िया मेला में एक करोड से अधिक श्रद्धालु गोवर्धन पहुंचते हैं और परिक्रमा करते हैं, हालांकि श्रद्धालुओं की गणना के लिए किसी सटीक वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग नहीं हुआ है, मुड़िया पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है, अब से 470 साल पहले सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन में प्रवेश करने पर उनके अनुयाई शिष्यों ने सिर मुढाकर परिक्रमा लगाई थी, तभी से मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
मुड़िया मेला 23 जुलाई से शुरू हुआ और यह मेला 30 जुलाई तक चलेगा, मुड़िया शौभा यात्रा की तैयारियां पूरी हो गई हैं, 29 जुलाई को गुरूपूर्णिमा है, इसी दिन गोवर्धन में मुडिया संतों की शोभायात्रा निकलती है जो इस आयोजना का मुख्य आकर्षण है, चैतन्य महाप्रभु से प्रभावित होकर उन्होंने मंत्री पद त्याग दिया और वृंदावन आ गए, यहां चैतन्य महाप्रभु से दीक्षा प्राप्त कर वह गोवर्धन में मानसी गंगा के तट स्थित चक्लेश्वर मंदिर के निकट कुटी बनाकर रहने लगे। वे वृद्धावस्था में भी प्रतिदिन गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा किया करते थे ।
सनातन गोस्वामी का अब से 469 वर्ष पहले आषाढ़ पूर्णिमा संवत 1559 को निधन हो जाने पर उनके शिष्यों ने परंपरानुसार सिर मुड़वा कर सनातन गोस्वामी की अर्थी के साथ गाते बजाते हुए कीर्तन कर परिक्रमा लगाई थी, सनातन गोस्वामी के निर्वाण की तिथि शिष्यों के लिए पुण्यतिथि बन गई, अनुयाई शिष्य सिर मुंडन कराकर शोभा यात्रा निकालते हैं, इस बार 470 वीं मुड़िया शोभा यात्रा निकाली जाएगी, सनातन गोस्वामी पश्चिमी बंगाल के शासक हुसैन शाह के दरबार में मंत्री थे, चैतन्य महाप्रभु से प्रभावित होकर उन्होंने मंत्री पद त्याग दिया और वह वृंदावन आ गए, यहां चैतन्य महाप्रभु से दीक्षा प्राप्त कर, वह गोवर्धन में मानसी गंगा के तट स्थित चक्लेश्वर मंदिर के निकट कुटी बनाकर रहने लगे, वे वृद्धावस्था में भी प्रतिदिन गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा किया करते थे ।







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