गुरु पूर्णिमा पर वृन्दावन के आश्रमों में उमड़ी शिष्यों की भीड
गुरु पूर्णिमा पर वृन्दावन के आश्रमों में उमड़ी शिष्यों की भीड
मथुरा । ब्रज के मठ मंदिरों में गुरु पूजन के लिए शिष्यों की भीड उमड रही, आश्रम और मठों में कई दिन से इस पर्व के लिए तैयारियां चल रही थीं, शिष्यों का आगमन भी कई दिन पहले से शुरू हो गया था, रौनक तो थी लेकिन गुरु पूर्णिमा पर उल्लास अपने चरम पर पहुंच गया, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, दाउजी, मथुरा आदि धार्मिक स्थलों पर भीड़ उमड़ती रही, ब्रजवासी भी आगंतुक श्रद्धालुओं की सेवा में कभी कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं ।


वात्सल्य ग्राम में गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर वात्सल्य मूर्ति साध्वी ऋतंभरा ने गुरु परम्परा की चरण पादुकाओं का पूजन किया, दीदी माँ के साधु एवं साध्वी शिष्यों ने गुरु चरण पूजन कर आरती की, साध्वी ऋतंभरा ने देश विदेश से आये सैकड़ों शिष्यों एवं साधकों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर ने का पर्व है क्यों कि जहाँ कृतज्ञता होती है, वहाँ शिकायत नहीं होती, सतगुरु हमारे बन्धनों को काटते है, इच्छाएं बिन पैंदी की बाल्टी के समान होती इनमें संसार भी समाजाए फिर भी भरती नहीं, मन कोल्हू के बैल के समान होता संसार के चक्कर काटते ही रहता है, समविद की बेटियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से गुरु महिमा का वर्णन किया, इस अवसर पर संजय गुप्ता, स्वामी सत्य शील, साध्वी सुहृदया, साध्वी सत्य प्रिया, साध्वी सत्य श्रुति, स्वामी सत्यश्रेय, स्वामी सत्यश्रवा आदि उपस्थित रहे ।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर बुधवार को बेलवन आश्रम में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, प्रातःकाल संत प्रेमानंद महाराज ने अपने दीक्षित परिकरों से स्नेहपूर्वक मुलाकात कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया, गुरु के दर्शन और आशीर्वचन प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में परिकर एवं श्रद्धालु सुबह से ही आश्रम में उपस्थित रहे, संत प्रेमानंद महाराज के आगमन पर दीक्षित परिकरों ने उनके स्वागत में मार्ग पर फूलों की चादर बिछा दी, पूरा वातावरण जयकारों, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना से भक्तिमय हो उठा, गुरु के दर्शन करते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और उनके चरणों में नमन कर जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बेलवन आश्रम में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर अपने जीवन में गुरु के महत्व को स्वीकार करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया ।
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