वृंदावन रंगनाथ मंदिर में हुई गज-ग्राह लीला, उमड़े श्रद्धालु
वृंदावन रंगनाथ मंदिर में हुई गज-ग्राह लीला, उमड़े श्रद्धालु
मथुरा । धार्मिक नगरी वृंदावन स्थित प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर में सावन के पावन अवसर पर परंपरागत गज-ग्राह लीला का भव्य मंचन किया गया, दक्षिण भारतीय वैष्णव परंपरा के अनुसार आयोजित इस दिव्य आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे, भगवान रंगनाथ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया ।
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परंपरा के अनुसार भगवान रंगनाथ गर्भगृह से स्वर्ण निर्मित गरुड़ वाहन पर सवार होकर शोभायात्रा के रूप में पूर्वी द्वार स्थित पवित्र पुष्करणी तक पहुंचे, इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक पाठ के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया, पुष्करणी पहुंचने के बाद सेवायतों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना और पाठ संपन्न कराया गया जिसके बाद गज-ग्राह लीला का प्रतीकात्मक मंचन प्रारंभ हुआ, पौराणिक कथा के अनुसार जलाशय में स्नान कर रहे गजराज को ग्राह (मगरमच्छ) अपने जबड़ों में जकड़ लेता है, लंबे संघर्ष के बाद जब गजराज भगवान विष्णु का स्मरण करता है, तब भगवान तत्काल उसकी रक्षा के लिए पहुंचते हैं।
इसी प्रसंग का सजीव मंचन किया गया जिसमें भगवान रंगनाथ बिना चरण पादुका धारण किए गरुड़ पर सवार होकर पहुंचे और सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजराज को संकट से मुक्त कराया, साथ ही ग्राह को भी मोक्ष प्रदान किया गया, करीब आधे घंटे तक चली इस दिव्य लीला के दौरान श्रद्धालु भक्ति में डूबे रहे और लगातार भगवान के जयकारे लगाते रहे, लीला के समापन पर कुंभ आरती संपन्न हुई, जिसके बाद भगवान रंगनाथ की सवारी पुनः गर्भगृह में विराजमान हुई, मंदिर के अनुज स्वामी ने बताया कि यह पौराणिक परंपरा मंदिर की स्थापना काल से चली आ रही है, इसका संदेश यही है कि भगवान अपने सच्चे भक्त की पुकार सुनकर उसकी रक्षा के लिए तुरंत उपस्थित होते हैं ।






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