विदेशी आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा लेकिन भक्ति नहीं डिगा पाए-योगी

विदेशी आक्रांताओं ने मंदिरों को तोड़ा लेकिन भक्ति नहीं डिगा पाए-योगी 
-स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह समेत 1051 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण व शिलान्यास
-समस्त प्रदेशवासियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं
-जवाहरबाग कांड का उपद्रव देखा था, अब क्षेत्र में उत्सव का माहौल-सीएम योगी आदित्यनाथ
    मथुरा । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रज की धरा से प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं, उन्होंने गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी वृंदावन में स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह समेत 1051 करोड़ की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया जिसमें 540 करोड़ से अधिक की 62 परियोजनाओं का लोकार्पण, 437 करोड़ से अधिक लागत की 167 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है, साथ ही आवास योजना के लाभार्थियों के खाते में 72 करोड़ से अधिक की धनराशि स्थानांतरित की गई ।


  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रज, अयोध्या, काशी आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भले ही मंदिरों को तोड़ा लेकिन वे हमारी भक्ति को कभी नहीं डिगा पाए, उन्होंने कहा कि स्वामी हरिदास जी महाराज ने भक्ति को संगीत का स्वरूप दिया, संगीत को साधना बनाया और इसे समाज की चेतना से जोड़ा, उनकी साधना ने एक सम्राट को भी भक्ति रस के साथ जोड़ने का अद्भुत कार्य किया, महान संगीतज्ञ तानसेन स्वामी हरिदास जी के शिष्य थे, सीएम ने कहा कि हम लोगों ने लंबे समय तक विकास को केवल सड़क, बिजली, पानी, भवन और उद्योग के चश्मे से देखने की कोशिश की, विकास के नाम पर विरासत का अपमान होता रहा, इतिहास के नायकों को भारतीय स्मृति से मिटाने की कोशिश हुई, पहले विदेशी आक्रांताओं, फिर अंग्रेजों ने हमारे इतिहास और ऐतिहासिक चिन्हों को नष्ट किया लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने तो हमारी विरासत की उपेक्षा व अपमान की हद पार कर दी । 


  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन, बलदेव क्षेत्र जिस विरासत और उत्सव के लिए जाना जा रहा है, वह 2017 के पहले संभव नहीं था, जून 2016 के जवाहर बांग कांड के उपद्रव और इसमें 29 लोगों के मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें हमारे दो पुलिस अधिकारी भी बलिदान हुए थे, ऐसे उपद्रव प्रदेश में उत्सव, विकास, सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण की कल्पना कौन कर सकता था, एक राष्ट्र अपनी स्मृति, संस्कृति, जड़ों को ढूंढने से महान बनता है, जिस समाज को विरासत का बोध होता है, वह दुनिया से सीखता और दुनिया को सिखाता भी है, भारत का इतिहास केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि संघर्ष, संरक्षण, पुनर्निर्माण, सनातन की निरंतरता का इतिहास है, मथुरा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित केशव देव मंदिर ने कई आक्रमण सहे, विदेशी आक्रांताओं ने मंदिर तोड़े लेकिन वे श्रीकृष्ण, राधारानी की स्मृति को नहीं मिटा पाए, न जन्माष्टमी का आयोजन रुका और न ही वृंदावन की भक्ति, न बरसाना की होली थमी और न गोवर्धन की परिक्रमा, यही है सनातन और ब्रज की शक्ति । 


   मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में मंदिरों पर प्रहार के प्रसंग मिलते हैं, किंतु उसी कालखंड में ब्रज की धरती पर स्वामी हरिदास जैसे संत साधना से संगीत की ऐसी धारा विकसित करते हैं जिसकी गूंज सदियों से चली आ रही है, यह अनंत काल तक हर संगीतज्ञ को आकर्षित करती रहेगी, काशी विश्वनाथ का मंदिर औरंगजेब ने तोड़ा लेकिन परंपरा कभी समाप्त नहीं हुई, लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने मंदिर के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आज काशी विश्वनाथ धाम भव्यता और आधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जा रहा है, अयोध्या में बाबर ने 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर को तोड़कर गुलामी का ढांचा बनवा दिया लेकिन इससे रामनवमी, पंचकोसी, 14 कोसी और 84 कोसी परिक्रमा, सावन का झूला मेला नहीं रुका, सनातन की आभा निरंतर बढ़ती रही और संघर्ष का जज्बा पैदा करती रही जिसका परिणाम है कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है । 


   योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को समझने के लिए संतों और कलाकारों की लोक विधा की कला को समझना पड़ेगा, क्रांतिकारियों और उन करोड़ों भारतीयों को पढ़ना होगा जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी इस सभ्यता को जीवित रखा, महाराज सुहेलदेव, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, महारानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य से लेकर एक लंबी परंपरा चली आई है, पूज्य संतों ने लोक कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, कहा कि विरासत केवल किसी भौतिक वस्तु में नहीं होती, यह हमारे मंदिरों, भाषाओं, साहित्य, संगीत, कला, दर्शन, गणित, विज्ञान, चिकित्सा, खगोल ज्ञान, लोक व ज्ञान परंपराओं में भी है। 
  सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इसमें नए आयाम (विरासत, विकास, आस्था, आर्थिकी, परंपरा और परिवर्तन भी) और आधुनिकता को भी जोड़ा है, अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन, नंदगांव, बलदेव, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली, नैमिषारण्य, सारनाथ, कुशीनगर जैसे तीर्थ स्थलों का विकास कर हम वर्तमान और भावी पीढ़ी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नयन को बढ़ा रहे हैं, बदलते उत्तर प्रदेश, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत कानून व्यवस्था और विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रमाण है कि गत वर्ष 156 करोड़ पर्यटक उत्तर प्रदेश आए, सीएम ने ब्रज की धरा से स्पष्ट संदेश दिया कि भारत विरासत से जुड़कर ही विकसित व आत्मनिर्भर राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करेगा, इसके लिए महिला, युवा, किसान, उद्यमी, कारीगर, हस्तशिल्पी समेत हर तबके का उन्नयन होना चाहिए, कानून का राज इसकी पहली शर्त है, श्रद्धालु, पर्यटक, निवेशक तभी आएंगे, जब उन्हें सुरक्षा पर भरोसा होगा, मां-बेटी तभी निर्भय होकर बाहर निकलेंगी, जब उसका शासन पर विश्वास होगा, सावन में गाजियाबाद से लेकर हरिद्वार के बीच 5 करोड़ कांवड़ यात्री निकले ।
   मुख्यमंत्री ने कहा कि बरेली में महीनों दंगे होते थे, दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर सम्मानित किया जाता था, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मेरठ, लखनऊ में दंगे होते थे लेकिन साढ़े 9 वर्ष में यूपी कर्फ्यू व दंगा मुक्त है, अब उत्सव हमारी पहचान है, अब मथुरा-वृंदावन में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आते हैं, रंगोत्सव, वैष्णव कुंभ, दुर्गा पूजा, रामनवमी, दीपोत्सव, शोभायात्राएं व महाकुंभ जैसे भव्य आयोजन हो रहे हैं, पहले उत्सव से पहले उपद्रव की आशंका रहती थी, भारत अब आस्था के सबसे बड़े आयोजनों को आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ आयोजित कर रहा है, उन्होंने कहा कि 8 वर्ष में 1000 करोड़ रुपये से ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने अनेक परियोजनाओं को पूरा किया, सुरक्षा, स्वच्छता, कनेक्टिविटी की सुविधा के साथ श्रद्धालुओं का सम्मान हो रहा है, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन, राधा कुंड, गोकुल, बलदेव, मथुरा आदि को पर्यटन विकास से जोड़ा जा रहा है, 84 कोसी, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग, कुंडों का पुनरुद्धार हो रहा है, उच्चतम न्यायालय का संरक्षण प्राप्त हुआ तो श्री बांके बिहारी मंदिर के आसपास के क्षेत्र का भव्य विकास भी होगा, वृंदावन में रोपवे, मेगा पार्किंग और मथुरा में राया अर्बन नोड जैसी परियोजनाओं के जरिए ब्रज के आधुनिक भविष्य की मजबूत नींव रखने का प्रयास प्रारंभ हुआ, ब्रज संस्कृति के संरक्षण और ब्रजभाषा के संवर्धन के उद्देश्य से सूरदास ब्रजभाषा अकादमी की स्थापना हुई, वृंदावन के नगरीय सीमा के भीतर ही 400 एकड़ क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा सिटी वन (सौरभी वन) विकसित किया जा रहा है ।

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