भक्ति, साधना और भारतीय संस्कृति के अमर प्रेरणास्रोत हैं स्वामी हरिदास
भक्ति, साधना और भारतीय संस्कृति के अमर प्रेरणास्रोत हैं स्वामी हरिदास
वृंदावन । हरिदास के 546वें आविर्भाव महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर स्वामी हरिदासीय रसोपासना पीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद देव जू के पावन सान्निध्य में स्वामी हरिदास के श्रीविग्रह का जड़ी-बूटियों, औषधीय द्रव्यों एवं सुगंधित पदार्थों से विशेष महाअभिषेक संपन्न हुआ, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल विनय कटियार ने कहा कि स्वामी हरिदास केवल महान संत और संगीत सम्राट ही नहीं, बल्कि भक्ति, साधना और भारतीय संस्कृति के अमर प्रेरणास्रोत हैं ।.jpg)
उन्होंने महोत्सव के आयोजकों को इस गौरवशाली परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए बधाई भी दी, महंत मोहिनी शरण ने कहा कि स्वामी हरिदास की भक्ति परंपरा केवल ब्रज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व को प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देती है, उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटियों से किया जाने वाला अभिषेक भारतीय सनातन संस्कृति में प्रकृति, आयुर्वेद और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है। इससे पूर्व महोत्सव के अंतर्गत दिनभर भजन-कीर्तन एवं समाज गायन का क्रम चलता रहा।
सायंकाल बनारस के कलाकारों द्वारा यमुना महारानी की भव्य महाआरती का आयोजन हुआ भजन गायक रसिक वैष्णवाचार्य विष्णु बाबा ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। इस अवसर पर महंत गंगा दास, राम सजीवन मिश्रा, सौरभ गौड़, कृष्ण कांत अग्रवाल, अनमोल कृष्ण, प्रिय दास, वैष्णव दास, नवल सख़ी, डॉ तनुजा विश्वास, स्मृति विश्वास आदि उपस्थित रहे।



















