संघ व्यक्तिवादी नहीं है, व्यक्तियों की प्रशंसा में विश्वास नहीं रखता-अजय अग्रवाल

संघ व्यक्तिवादी नहीं है, व्यक्तियों की प्रशंसा में विश्वास नहीं रखता-अजय अग्रवाल
-महानगर के दिवंगत स्वयंसेवकों के संस्मरणो पर संकलित किताब का हुआ विमोचन
   मथुरा । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महानगर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, महानगर निवासी संघ के दिवंगत स्वयंसेवको के जीवन संस्मरणो के संकलन का कार्य संघ सरिता के अमर मोती भावांजलि ( भाग-1) नामक पुस्तक में संघ के 38 वर्ष पुराने कार्यकर्ता अजय सर्राफ़ ने किया जिसका विमोचन समारोह चित्रकूट मसानी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्राम विकास के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ0 दिनेश, वृंदावन सुदामा कुटी के नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्ष्ण दास महाराज एवं उद्योगपति सुरेशचंद अग्रवाल ने किया ।


   राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, प्रांतीय, विभागीय संघ परिवार के अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में विमोचन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, इस दौरान अजय अग्रवाल ने कहा कि संघ व्यक्तिवादी नहीं है और व्यक्तियों की प्रशंसा में विश्वास नहीं रखता इसलिये पुस्तक लिखने में कठिनाई आयी क्योंकि जिन 73 स्वयंसेवकों के संस्मरण इस पुस्तक में संकलित किये गए हैं, वह आज इस भौतिक जगत में नहीं हैं और जब सत्य इतिहास का लेखन नहीं होगा तो लोग मनगढ़ंत इतिहास बताने लगते हैं, संकलित सभी स्वयंसेवक मथुरा में जब 1940 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ हुआ उंस प्रारंभिक काल से जुड़े हुये लोग हैं तो इस संघ सरिता के अमर मोती नामक पुस्तक में मथुरा में संघ कब प्रारम्भ हुआ कैसे हुआ, कौन-कौन लोग थे उंस समय और पहली शाखा कब लगी ।
   आंदोलनों में मथुरा के स्वयंसेवकों की उंस समय की क्या भूमिका रही को संक्षिप्त रूप से संकलित किया है, भावांजलि में यह भी वर्णित है मथुरा में संघ की पहली शाखा कब और कहां लगी। उस समय के कार्यकर्ताओं के नाम,उस समय कैसी कैसी आर्थिक अभाव ग्रस्तता के बाद भी लोगों में राष्ट्र कार्य किया, 1975 के आपातकाल की सत्ता के खलनायकी स्वरूप को यातनाओं के रूप में जेलों के अंदर भी और बाहर भी झेला, मथुरा में इतनी विषम परिस्थितियों में संघ कार्यालय की जमीन समाज के आर्थिक सहयोग से खरीदना जिससे सिर ढकने को प्रचारकों को जगह मिल जाये ।

 

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