चरकुला लोक नृत्य कार्यशाला का समापन, लोक संस्कृति को दिया संरक्षण

चरकुला लोक नृत्य कार्यशाला का समापन, लोक संस्कृति को दिया संरक्षण 
  मथुरा । संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में 24 जून से 8 जुलाई तक आयोजित हुई 15 दिवसीय चरकुला लोकनृत्य कार्यशाला का भव्य एवं गरिमामय वातावरण में समारोह पूर्वक समापन हुआ, समापन समारोह में प्रतिभागियों ने पारंपरिक चरकुला लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियाँ देकर अतिथियों एवं दर्शकों को ब्रज की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत से परिचय कराया, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया तथा विशिष्ट अतिथि संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज रहे, कार्यक्रम को सफल बनाने में विशाल सिंह आईएएस, निदेशक, संस्कृति निदेशालय, लखनऊ तथा डॉ0 राजेश अहिरवार, सहायक निदेशक, संस्कृति निदेशालय, लखनऊ का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। 


   मुख्य अतिथि पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि चरकुला लोकनृत्य ब्रज की सांस्कृतिक पहचान एवं लोक आस्था का सशक्त प्रतीक है, इस प्रकार की कार्यशालाएँ हमारी अमूल्य लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम हैं। विशिष्ट अतिथि संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने भारतीय संस्कृति एवं ब्रज की लोकधरोहर के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए युवाओं से इन परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया, कार्यशाला में खामनी, मांट, गोवर्धन, सौंख, मथुरा एवं वृन्दावन से कुल 25 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया, कार्यशाला में प्रशिक्षिका श्रीमती शशि देवी एवं राजेश प्रसाद शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को चरकुला लोकनृत्य का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करते हुए चरकुला नृत्य की पारंपरिक शैली, वेशभूषा, चरकुला गीत, ताल-लय एवं मंचीय प्रस्तुति का विस्तृत अभ्यास कराया गया ।
   सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में रवि जोशी ने हारमोनियम, विजय सिंह ने ढोलक, दामोदर ने मंजीरा तथा शाहरुख ने छोटा नगाड़ा वादन कर लोकनृत्य को सजीव एवं आकर्षक बनाया, कार्यक्रम का संयोजन एवं प्रभावी संचालन ब्रज संस्कृति संग्रहालय की क्यूरेटर ममता गौतम द्वारा किया गया, उन्होंने अतिथियों, प्रशिक्षकों, कलाकारों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा अंत में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया, समापन समारोह में प्रतिभागियों ने चरकुला लोकनृत्य की उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ देकर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की, कार्यशाला के माध्यम से चरकुला नृत्य के नवोदित कलाकारों के 4 ग्रुप तैयार हुए, समारोह के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए । 

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