टीईटी से मुक्ति के लिए आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग, सौंपा ज्ञापन
टीईटी से मुक्ति के लिए आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग, सौंपा ज्ञापन
-राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सांसद को सौंपा ज्ञापन, समाधान का मिला आश्वासन
मथुरा । राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की जिला इकाई ने गुरुवार को राज्यसभा सदस्य तेजवीर सिंह को ज्ञापन सौंपकर टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराने तथा इसके लिए आरटीई एक्ट में आवश्यक संशोधन करने की माँग की, सांसद ने आश्वासन दिया कि मैं शिक्षकों की आवाज को शिक्षा मंत्री के सामने रखूंगा, प्रादेशिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ0 कमल कौशिक ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बाद में निर्धारित पात्रता मानदण्डों को भूतलक्षी प्रभाव से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है ।
जिलाध्यक्ष अंजना शर्मा ने कहा कि सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देश एवं प्रदेश के उन लाखों शिक्षकों में चिंता व्याप्त है जिनकी नियुक्ति टीईटी लागू होने से पूर्व तत्कालीन नियमों एवं निर्धारित योग्यताओं के आधार पर विधिवत हुई थी, प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से अनुरोध किया कि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा-अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाने हेतु भारत सरकार के समक्ष प्रभावी पहल करें।
जिला मीडिया प्रभारी गोवर्धन दास गुप्ता ने बताया कि यह अभियान देशभर में चलाया जा रहा है और विभिन्न जिलों में सांसदों को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लेगी, कार्यकारी अध्यक्ष हेमराज सिंह ने कहा शिक्षकों की इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक लड़ा जाएगा, ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ अंजना शर्मा, जिला मंत्री बच्चू सिंह, जिला संयुक्त मंत्री मनोज रावत, ब्लॉक अध्यक्ष गोवर्धन अशोक फौजदार, अविनाश शुक्ला, मनमोहन गौतम, दिगंबर सिंह, कृष्णकांत उपाध्याय आदि उपस्थित रहे ।







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