लठामार होली : उडत गुलाल लाल भये बदरा, सुधबुध भूले ’देखनवारे’
लठामार होली : उडत गुलाल लाल भये बदरा, सुधबुध भूले ’देखनवारे’
-बरसाना की लठामार होली में जीवंत हो उठी सदियों पुरानी परंपरा, हुरियारिनों ने बरसाईं लाठियां
बरसाना । ब्रह्मांचल पर्वत की गोद में बसे बरसाने की रंगीली गली में गोपियों की लाठियों की मार झेल रहे नंदगांव के गोप सदियों पुरानी परंपरा का निर्वान्ह कर रहे थे, कहा जाता है कि इस अद्भुत व आलोकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं, बुधवार को शाम ढल रही थी, आसमान में पहाडी के उपर मानों भगवान सूर्य भी अस्त होना नहीं चाहते थे, ऐसा लग रहा था मानो सूर्य देव भी इस दृष्य को देखने के लिए ठहर गये हों ।

लठामार होली का वह अद्भुत दृश्य साकार हो उठा जिसे देखने के लिए मानव क्या देवता भी तरसते हैं, होली ठिठोली और लठ्ठों की बोछार, रंगों की फुहार और आसमान में सूर्य देव की ठिठकन, आद्भुत नजारा देखने के लिए देवता भी देव लोक से उतर आते हैं, हुरियारियों की लाठियों के वार को मयूरी थिरकन के साथ जतन से तैयार की गई ढाल पर हुरिये सहते और अपना बचाव करते हुए मौदान में डट गये, अदभुत आलौकिक दृश्य को देखने के लिए मानो भगवान भाष्कर भी आसमन में ठिठक गये हौं। ’रंग मत डारे नन्दकिशोर हमारी राधा गोरी है।’ जब नन्दगांव से नन्दनन्दन बरसाना होली खेलने आये तो सखियां कहती हैं कि नन्दबाबा गोरे, यशोदा मइय्या गोरी और दाऊजी भी गोरे हैं तो तुम कारे कहा ते हो गये, तुम पे तो कोई रंग चढ़ेगो ना हीं। हमारी श्रीराधेजू गोरी है सब रंग दिखेंगे। ब्रज की लठामार होली का वर्णन बड़ा ही सुन्दर और पौराणिक है ।
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अनुपम होली होत है, लठ्ठन की सरनाम!
अबला सबला सी लगै, बरसाने की वाम!!
लठ्ठ धरै कंधा फिरै, जबहिं भगावत ग्वाल!
जिमि महिषासुरमर्दिनी, चलती रण में चाल!
कान्हा की नगरी बरसाना में सदियों पुरानी लीला एक बार फिर जीवंत हो उठी, लठामार होली खेलने के लिए कान्हा के नंदगांव से हुरियारे राधारानी के गांव बरसाना आए, बरसाना की हुरियारिनों ने प्रेम से पगी लाठियों उन पर बरसाईं तो अबीर गुलाल के साथ रंगों की बरसात होने लगी, श्रीजी मंदिर से लेकर बरसाना की गलियां रंगों से सराबोर हो गईं, दिव्य और भव्य लठमार होली को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु आए, कान्हा के सखा माने जाने वाले नंदगांव के हुरियारे बुधवार को सुबह नंदभवन में एकत्रित हुए।
पद गाकर उनसे होली खेलने साथ चलने को कहा, नंदगांव के हुरियारे चलौ बरसाने में खेलें होरी पद गाते हुए श्रीकृष्ण स्वरूप पताका को साथ लेकर बरसाना के लिए निकले, बरसाना की हुरियारिनों के लाठियों से बचने के लिए ढाल उनकी हाथों में थी, धोती, बगलबंदी, पीतांबरी से सुसज्जित हुरियारे रंग गुलाल उड़ाते ही पैदल बरसाना धाम पहुंचे, इस अलौलिक लीला का साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु बरसाने का पावन धरा पर आए, सुबह से ही लोगों ने बरसाने में डेरा डाल लिया, हर कोई होली की मस्ती में झूमता नजर आया, डीएम चंद्र प्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार भी लठामार होली सव्यवस्थाओं को संभालते हुए दिखाई दिए ।







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