अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठी : शिक्षाष्टक के श्लोकों पर केन्द्रित रहा व्याख्यान
अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठी : शिक्षाष्टक के श्लोकों पर केन्द्रित रहा व्याख्यान
मथुरा । वृन्दावन शोध संस्थान में शनिवार को दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठी के अन्तर्गत दूसरे दिन समापन सत्र में देश-विदेश के विद्वानों द्वारा शिक्षाष्टक के श्लोकों पर केन्द्रित व्याख्यान प्रस्तुत किए, इस क्रम में सर्वप्रथम अमेरिका के हवाई विश्वविद्यालय से प्रो0 अरिंदम चक्रवर्ती ने शिक्षाष्टक पर चर्चा हुए कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु श्रीराधाकृष्ण मिलित विग्रह है, वे आप्तकाम एवं आत्माराम है, महाभाव से तात्पर्य है विशुद्ध प्रेम, ब्रह्म ने आनंद लेने के लिए स्वयं को दो रूपों में विभाजित किया।
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आसाम से प्रो0 अर्जुनदेवसेन शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अनंदतनु अर्थात आनंद की काया है, चैतन्य महाप्रभु स्वयं अवतार न होकर अवतारी है, वे भी स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की चरण रज प्राप्ति की अभिलाषा करते हैं, सोफिया विश्वविद्यालय टोक्यो के प्रो0 कियोकाजु ओकिता ने शिक्षाष्टक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विभिन्न कालक्रमों में इसकी समृद्ध परम्परा दृष्टिगोचर होती है। विभिन्न आचार्यों ने इन पर अपनी-अपनी टीकायें की है। .jpg)
द्वितीय सत्र में डॉ0 अच्युतलाल भट्ट ने कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपनी सुदीप्त, सात्विक तथा महाभाव दशा में जो वचन कहे, उनको शिक्षाष्टक कहा गया, शिक्षाष्टक कांता सम्मत पद्यावली है, इस कारण इसका प्रभाव अधिक होता है, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो0 नृत्यगोपाल ने शिक्षाष्टक और अष्टक परंपरा पर प्रकाश डाला, इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीचौतन्य महाप्रभु के चित्रपट पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण से हुआ, गोष्ठी के समापन सत्र में संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने कहा कि शिक्षाष्टक पर जो सार्थक चर्चा हुई उससे हमेें प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है, देश-विदेशों से जुड़े इन विद्वानों के विचारों को संस्थान द्वारा संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा ।
आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने शिक्षाष्टक से जुड़ी सूक्ष्म जानकारियाँ चर्चा के दौरान साझा करते हुए कहा कि संगोष्ठी के माध्यम से प्राप्त भक्ति ज्ञानामृत का सुुफल पुस्तकाकार रूप मेें शीघ्र ही प्राप्त होगा, धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ0 राजीव द्विवेदी ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से संस्थान को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, इसी क्रम में आगे भी आयोजन संस्थान द्वारा किए जायेंगे, कार्यक्रम का संयोजन डॉ0 राजेश शर्मा एवं संचालन डॉ0 अभिषेक बोस द्वारा किया गया, मेगुमी मतसंगा, डॉ0 चन्द्रप्रकाश शर्मा, कपिलदेव उपाध्याय, वृजमोहन पाण्डेय, सुमनकांत पालीवाल, अनुपमा, संगीता, प्रभुदास बाबा, माधव, नीना शर्मा, चन्द्रवती शर्मा, मृदुल गोस्वामी, महंत मधुमंगल शुक्ला एवं दाऊजी सहित संस्थान कर्मी उपस्थित रहे ।






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