ठा0 रंगनाथ भगवान ने मोहिनी स्वरूप में दिये दर्शन, भक्त हुए कृतार्थ
ठा0 रंगनाथ भगवान ने मोहिनी स्वरूप में दिये दर्शन, भक्त हुए कृतार्थ
मथुरा । तीर्थनगरी के प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव में पंचम दिवस ठा0 रंगनाथ भगवान मोहिनी स्वरूप में रजत निर्मित पालकी में सवार होकर भक्तो को कृतार्थ करने निकले, प्रभु के अद्भुत स्वरूप के दर्शनों के लिए भक्तों में भारी उल्लास देखा गया, श्री रामानुज संप्रदाय के प्रमुख दिव्य देश श्री रंगमंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के पांचवे दिन बुधवार को भगवान रंगनाथ ने मोहिनी स्वरूप धारण किया ।
गर्भगृह से स्वर्णाभूषण से अलंकृत ठाकुर जी को रजत निर्मित पालकी में विराजित कर कुंभ आरती उतारी गई, उसके बाद बैंड बाजे और दक्षिण के परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ सवारी श्री वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख स्थानों पर होते हुए रंगजी के बड़ा बगीचा पहुंची, कुछ समय विश्राम के बाद ठाकुर जी सवारी श्री वैष्णव संप्रदाय से जुड़े मंदिर देवालयों में पहुंची ।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान् की यह कथा समुद्र मंथन के समय की है जिसमे श्री नारायण ने बहुत ही सुन्दर मोहिनी रूप का वेष धारण किया था, भगवान् ने इस रूप को धारण कर सभी असुरों को अपने रूप से मोहित कर दिया था एवं प्रत्येक देवता गणों को अमृत का पान कराया था, वर्तमान समय में नारी के इस अलौकिक मोहिनी रूप से असुर तो मोहित होते है परन्तु दिव्यजन दर्शन कर भक्ति की डगर पर चल पड़ते है, भगवान के इस अलौकिक मोहिनी रूप के दर्शन मात्र होने से भक्त मोह माया से विरक्त होकर प्रभु भक्ति में लीन हो जाते हैं ।






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