यूपी का बेस्ट टूरिज्म विलेज जैंत बहा रहा है अपनी बदहाली पर आंसू
यूपी का बेस्ट टूरिज्म विलेज जैंत बहा रहा है अपनी बदहाली पर आंसू
-बेस्ट टूरिज्म विलेज के ग्रामीण परेशान, सम्मान और बदहाली के बीच फंसा जैत गांव
चौमुहां (मथुरा) । राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मथुरा की जैंत ग्राम पंचायत को बेस्ट टूरिज्म विलेज श्रेणी में वर्ष 2025 के गोल्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, पुरस्कार प्रधान प्रतिनिधि संजय सिंह, पंचायत सचिव लवी बंसल, आदर्श सेवा समिति के जिला समन्वयक प्रकाश सिंह कुशवाहा ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के हाथों ग्रहण किया था जिसपर सूचना पर गांव के लोग खुशी से झूम उठे थे, प्रधान ममता देवी ने भी उम्मीद जताई थी कि अब गांव का विकास होगा ।

जैंत गांव अपनी प्रसिद्ध तुलसी की खेती और कंठी माला बनाने की हस्तकला के लिए मशहूर है, गांव को पर्यटन के वैश्विक और राष्ट्रीय मानचित्र पर प्रमुख ग्रामीण पर्यटन स्थल के रूप में विशेष पहचान जरूर मिली और रिस्पांसिबल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिस्पांसिबल टूरिज्म की टीम और विदेशी प्रतिनिधिमंडल इस गांव का दौरा कर चुके हैं, इसके बाद भी गांव के लोग खुश नहीं हैं, ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी फाइलों में मॉडल गांव बना जैत जमीनी स्तर पर नारकीय स्थिति से जूझ रहा है, गांव की गलियों में जमा कीचड़ और जलभराव ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है, सबसे गंभीर स्थिति स्कूली बच्चों की है, घुटनों तक भरे गंदे पानी और फिसलन भरे कीचड़ से होकर बच्चे बमुश्किल स्कूल पहुंच पा रहे हैं, कई बार बच्चे इस गंदगी में गिरकर चोटिल हो जाते हैं और उनकी किताबें व यूनिफॉर्म खराब हो जाती है ।
ठाकुर नरेश सिंह ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि गांव को पर्यटन का खिताब मिलना हमारे लिए गर्व की बात थी,ल लेकिन आज हमें अपने ही गांव में चलने में शर्म आती है, ग्राम प्रधान और सचिव को बार-बार कहने के बावजूद सफाई का कोई नामोनिशान नहीं है, नालियां चोक हैं और गंदा पानी हमारे घरों के दरवाजों तक खड़ा है, अगर यही बेस्ट टूरिज्म है तो हमें ऐसा सम्मान नहीं चाहिए, रामकटोरी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि गंदगी और मच्छरों के कारण रात भर नींद नहीं आती है, बच्चे आए दिन बीमार पड़ रहे हैं, कीचड़ की वजह से घर से निकलना दूभर हो गया है, ऐसा लगता है जैसे प्रशासन हमें भूल गया है, हम बस नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं और कोई सुनने वाला नहीं है ।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम पंचायत में कोई विकास कार्य नहीं कराया जा रहा है, पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान की अनदेखी से गांव में संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है, स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल निकासी और सफाई की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो वे जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को विवश होंगे, एक तरफ पर्यटन के क्षेत्र में सम्मान और दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं का यह अकाल प्रशासनिक सिस्टम की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़ा करता है, आखिर जैत गांव का यह मॉडल स्वरूप कब तक कीचड़ में दबा रहेगा ?







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